रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग

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रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग


तुलसी स्मारक समिति ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को सौंपा ज्ञापन

बांदा, 20 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में तुलसी स्मारक समिति, राजापुर के पदाधिकारियों ने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को ज्ञापन सौंपकर रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किए जाने की मांग की। समिति के सह-सचिव शिवपूजन गुप्ता अपने सहयोगी पदाधिकारियों पूर्व सभासद सतीश चंद्र सिंह, संदीप कुमार, जीतेंद्र द्विवेदी, राहुल मिश्रा, कुमारी अंतिमा द्विवेदी, डॉ. प्रांशु गुप्ता एवं डॉ. अखिलेश करवरिया—के साथ चिल्ला रोड स्थित रामदा होटल पहुंचे और यह ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से समिति ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का सामना करते हुए सनातन धर्म की रक्षा और संरक्षण के उद्देश्य से रामचरितमानस की रचना की। इस महान ग्रंथ में राजनीतिक, धार्मिक, पारिवारिक मूल्यों के साथ-साथ भाईचारे और प्रेम की नीतियों का समावेश है, जो समाज को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। रामचरितमानस में सनातन धर्म का समग्र रस निहित है, इसलिए इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए।

समिति ने यह भी उल्लेख किया कि रामचरितमानस संत समाज और आम जनमानस दोनों के लिए सरल, सुलभ और अनुकरणीय ग्रंथ है, जिसे पढ़कर लोग अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाते हैं।

इस अवसर पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने समिति के ज्ञापन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक प्रेषित करने का आश्वासन दिया। वहीं, समिति के सह-सचिव शिवपूजन गुप्ता ने बताया कि इससे पूर्व भी समिति की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किए जाने संबंधी ज्ञापन भेजा जा चुका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह

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