नौ माह तक मृत्यु प्रमाणपत्र रोके रखने पर पालिका कर्मचारी पर कार्रवाई के निर्देश
बांदा, 30 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में जरूरी दस्तावेज और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद करीब नौ माह तक मृत्यु प्रमाणपत्र जारी न करने पर नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर स्थायी लोक अदालत ने गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने प्रमाणपत्र जारी करने में हुई देरी को सेवा में कमी मानते हुए जिम्मेदार कर्मचारी को चिन्हित कर विभागीय जांच के बाद विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
शहर के कैलाशपुरी निवासी अधिवक्ता गिरजेश कुमार पांडेय ने अपनी मां स्व. रामरती देवी पांडेय की 22 जून 2008 को हुई मृत्यु का प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 21 अगस्त 2025 को नगर पालिका परिषद में आवेदन किया था। आवेदन के साथ शपथपत्र, दो गवाहों के शपथपत्र, आधार कार्ड और 10 रुपये विलंब शुल्क का चालान भी जमा किया गया था। इसके अलावा नगर पालिका के सफाई नायक सहित संबंधित कर्मचारियों से मौके का सत्यापन भी कराया गया।
इसके बावजूद प्रमाणपत्र जारी नहीं होने पर गिरजेश कुमार ने 29 अक्तूबर 2025 को स्थायी लोक अदालत में वाद संख्या 67/2025 दाखिल किया। सुनवाई के दौरान नगर पालिका की ओर से शुरुआत में शपथपत्रों में ओवरराइटिंग और व्हाइटनर होने तथा मृत्यु से संबंधित अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध न होने की बात कही गई।
बाद में 16 मई 2026 को नगर पालिका ने उपजिलाधिकारी को भेजी अपनी आख्या में बताया कि आवेदक ने मृत्यु तिथि का शपथपत्र और दो गवाहों के शपथपत्र प्रस्तुत किए हैं। 10 रुपये शुल्क भी जमा किया गया है। सफाई नायक, जन्म-मृत्यु लिपिक और सफाई निरीक्षक की जांच आख्या भी संलग्न है। नगर पालिका ने प्रमाणपत्र जारी करने की संस्तुति भी कर दी।
प्रमाणपत्र जारी करने में देरी को माना सेवा में कमी
अदालत ने आदेश में कहा कि याची की मुख्य मांग यानी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। हालांकि, आवेदन के बाद करीब नौ माह तक प्रमाणपत्र जारी न किया जाना विभागीय स्तर पर लापरवाही को दर्शाता है। अदालत ने इसे सेवा में कमी माना। याची की ओर से अनैतिक धन की मांग किए जाने के आरोप का भी उल्लेख किया गया, लेकिन अदालत ने इसे मौखिक आरोप मानते हुए इस संबंध में कोई स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं होने की बात कही।
जिम्मेदार कर्मचारी को चिन्हित कर कार्रवाई के आदेश
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विवेक कुमार गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य डॉ. ब्रह्मदत्त सिंह और सदस्या शिवांगी शुक्ला की पीठ ने वाद स्वीकार करते हुए अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद बांदा को निर्देश दिए कि मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में हुई देरी के लिए जिम्मेदार कर्मचारी को चिन्हित किया जाए। इसके बाद मामले की समुचित विभागीय जांच कर दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
वरिष्ठ सदस्य डॉ. ब्रह्मदत्त सिंह बुधवार को यह जानकारी दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह

