दशावतार मंदिर क्षेत्र में बनेगा भव्य प्रवेश द्वार, बढ़ेंगी पर्यटक सुविधाएं

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दशावतार मंदिर क्षेत्र में बनेगा भव्य प्रवेश द्वार, बढ़ेंगी पर्यटक सुविधाएं


लखनऊ, 24 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बुंदेलखंड को पर्यटन सुविधाओं से सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जनपद ललितपुर के ऐतिहासिक देवगढ़ स्थित विश्व प्रसिद्ध दशावतार मंदिर के समीप पर्यटकों की सुविधा ए लिए अत्याधुनिक वे-साइड ऐमिनिटी विकसित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 2.80 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की गई है। परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए 1.75 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। इस पहल से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा बुंदेलखंड के धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने रविवार को बताया कि 'गुप्तकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाने वाला भगवान विष्णु को समर्पित दशावतार मंदिर उत्तर भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में शामिल है। अपनी ऐतिहासिक भव्यता, दुर्लभ शिल्पकला और धार्मिक महत्व के कारण यह देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। झांसी के निकट स्थित होने से यह स्थल बुंदेलखंड पर्यटन परिपथ को भी विशिष्ट पहचान देता है। ललितपुर में वर्ष 2025 में 60.74 लाख पर्यटकों का आगमन प्रदेश के पर्यटन परिदृश्य को दर्शाता है।'

विकास कार्यों से बदलेगा स्वरूप

ललितपुर स्थित ऐतिहासिक दशावतार मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं व पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मंदिर परिसर के निकट आधुनिक वे-साइड ऐमिनिटी विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (यूपीएवीपी) को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। परियोजना के तहत भव्य प्रवेश द्वार निर्माण, मिट्टी एवं कंक्रीट कार्य, आरसीसी और चिनाई कार्य के साथ स्टील संरचना, आकर्षक फर्श निर्माण और क्लैडिंग कार्य कराए जाएंगे। इस विकास कार्य से मंदिर क्षेत्र की सुंदरता और पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलेगा।

दशावतार मंदिर का इतिहास

देवगढ़ स्थित दशावतार मंदिर को उत्तर प्रदेश की प्राचीन सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत का अद्भुत प्रतीक माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर उत्तरी भारत का सबसे प्राचीन ज्ञात मंदिर माना जाता है, जिसका निर्माण गुप्तकाल में हुआ था। इसकी दीवारों और शिल्पकला में अंकित भगवान विष्णु के दशावतार, गंगा-यमुना देवियों की आकर्षक नक्काशी तथा वैष्णव पौराणिक कथाओं के दुर्लभ चित्रण भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत करते हैं। मंदिर में भगवान विष्णु की नर-नारायण तपस्या मुद्रा तथा शेषनाग पर शयन करती प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित करीब 1500 वर्ष पुराना दशावतार मंदिर स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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