उप निबंधक कार्यालयों के संभावित निजीकरण के विरोध में दफ्तरों पर तालाबंदी, सरकार के खिलाफ नारेबाजी

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उप निबंधक कार्यालयों के संभावित निजीकरण के विरोध में दफ्तरों पर तालाबंदी, सरकार के खिलाफ नारेबाजी


ई-रजिस्ट्री व्यवस्था, निजीकरण के विरोध में स्टाम्प विक्रेता, दस्तावेज लेखक और अधिवक्ताओं की हड़ताल जारी

हाथरस, 23 जून (हि.स.)। ई-रजिस्ट्री व्यवस्था और उप निबंधक कार्यालयों के संभावित निजीकरण के विरोध में स्टाम्प विक्रेताओं, दस्तावेज लेखकों और अधिवक्ताओं की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। इस हड़ताल के कारण उप निबंधक कार्यालय का कामकाज पूरी तरह ठप रहा, जिससे रजिस्ट्री कराने आए लोगों के साथ-साथ शपथ पत्र बनवाने पहुंचे छात्र और बेरोजगार युवक-युवतियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंगलवार सुबह से ही स्टाम्प विक्रेताओं, दस्तावेज लेखकों और अधिवक्ताओं ने अपने कार्यालयों पर तालाबंदी कर दी। उन्होंने उप निबंधक कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ई-रजिस्ट्री व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों को वापस लेने की मांग की। धरना दे रहे दस्तावेज लेखकों और स्टाम्प विक्रेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा लागू की जा रही नई व्यवस्था से उनके रोजगार पर सीधा संकट मंडरा रहा है। उनका आरोप है कि निबंधन प्रक्रिया के कई कार्य निजी एजेंसियों अथवा अधिकृत कलेक्शन सेंटरों को सौंपे जाने की तैयारी है, जिससे वर्षों से इस पेशे से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया और ई-पेमेंट व्यवस्था लागू होने के बाद स्टाम्प विक्रेताओं की आय पहले ही प्रभावित हो चुकी है। साथ ही, दस्तावेज लेखकों का पारंपरिक कार्य भी समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ रही है। हड़ताल के कारण उप निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री, बैनामा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का कार्य पूरी तरह बंद रहा। दूर-दराज के गांवों और कस्बों से पहुंचे लोगों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा। वहीं, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, नौकरियों और सरकारी योजनाओं के लिए शपथ पत्र बनवाने आए छात्र एवं बेरोजगार युवा भी दिनभर भटकते रहे। कई अभ्यर्थियों ने बताया कि आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक होने के बावजूद शपथ पत्र न बन पाने से उनकी चिंता बढ़ गई है, जिससे उनके आवेदन प्रभावित हो सकते हैं।

धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष राजकुमार दीक्षित ने किया। इस दौरान श्याम सुंदर गिरी, तेज बहादुर सिंह, देवेंद्र कौशिक, विनोद बाबू, सोमदत्त, जोगिंदर सिंह, संजय कुलश्रेष्ठ, वरुण जायसवाल, मन्नू जायसवाल, एडवोकेट हरिशंकर गिरी, एडवोकेट मनोज पाराशर, मोहर सिंह यादव, देवेंद्र सिंह, सुखदेव सिंह, तपन जोहर, विश्वेंद्र प्रताप सिंह, रेखा चौहान, उर्मिला देवी, राजेश यादव एवं नंदकिशोर सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मदन मोहन राना

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