सीएसजेएमयू के शोध से साइबर सुरक्षा को मिली नई धार, डिजिटल संचार बनेगा अधिक सुरक्षित

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सीएसजेएमयू के शोध से साइबर सुरक्षा को मिली नई धार, डिजिटल संचार बनेगा अधिक सुरक्षित


कानपुर, 18 जनवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में कल्याणपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), में हुए एक पीएच.डी. शोध ने डिजिटल संचार और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के गणित विभाग में शोधार्थी शिव गुलाम द्वारा किए गए इस शोध ने आधुनिक डिजिटल युग में डेटा सुरक्षा, प्रामाणिकता और अखंडता को और अधिक मजबूत बनाने की संभावनाएँ प्रस्तुत की है। यह जानकारी रविवार काे मीडिया प्रभारी डाॅ दिवाकर अवस्थी ने दी।

“एलिप्टिक कर्व क्रिप्टोग्राफी में डिजिटल सिग्नेचर का अध्ययन” विषय पर केंद्रित इस शोध में एलिप्टिक कर्व क्रिप्टोग्राफी (ईसीसी) आधारित डिजिटल सिग्नेचर तकनीकों का गहन विश्लेषण किया गया। शोध निष्कर्षों के अनुसार, ईसीसी तकनीक मात्र 160 बिट्स में वही सुरक्षा स्तर उपलब्ध कराती है, जिसके लिए पारंपरिक क्रिप्टोग्राफिक प्रणालियों में 1024 बिट्स तक की आवश्यकता होती है। इससे न केवल सुरक्षा स्तर बेहतर होता है, बल्कि कम बैंडविड्थ और सीमित स्टोरेज वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए यह तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।

शोध में यह भी सामने आया है कि ईसीसी आधारित डिजिटल सिग्नेचर कम बैंडविड्थ वाले संचार माध्यमों में भी प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं, जहाँ पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियाँ अक्सर सीमित साबित होती हैं। यह तकनीक विशेष रूप से IoT डिवाइसेज़, स्मार्ट कार्ड्स, एम्बेडेड सिस्टम्स और हार्डवेयर आधारित सुरक्षा प्रणालियों के लिए लाभकारी है। चिप प्रमाणीकरण जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इसके प्रयोग से साइबर हमलों की आशंकाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यह शोध शोध मार्गदर्शक एवं डीन रिसर्च डॉ. नमिता तिवारी के निर्देशन में पूर्ण हुआ। उन्होंने बताया कि भविष्य में इस शोध को पोस्ट-क्वांटम डिजिटल सिग्नेचर स्कीमों के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे क्वांटम कंप्यूटिंग से उत्पन्न संभावित खतरों के विरुद्ध भी डिजिटल सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सकेगा। इससे हाइब्रिड डिजिटल सिग्नेचर प्रणालियों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध डिजिटल इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप सुरक्षित, स्वदेशी और उन्नत डिजिटल अवसंरचना के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा। यह उपलब्धि न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी व्यावहारिक उपयोगिता इसे उद्योग और राष्ट्रहित दोनों के लिए लाभकारी बनाती है। साथ ही, यह सीएसजेएमयू की तकनीक-आधारित, नवाचारपूर्ण और समाजोपयोगी अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता को भी सशक्त रूप से रेखांकित करती है।

हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद

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