शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा सीएसजेएमयू और इंडोनेशिया के यूएनएमएएस के बीच हुआ एमओयू : प्रो. विनय कुमार पाठक

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शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा सीएसजेएमयू और इंडोनेशिया के यूएनएमएएस के बीच हुआ एमओयू : प्रो. विनय कुमार पाठक


कानपुर, 05 जून (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग, संयुक्त अनुसंधान और छात्र-शिक्षक विनिमय कार्यक्रम उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय और इंडोनेशिया की यूनिवर्सिटास महासनस्वती (UNMAS) के बीच हुआ समझौता विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। यह साझेदारी ज्ञान, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में दोनों संस्थानों को मजबूत बनाएगी। यह बातें शुक्रवार को सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर और यूनिवर्सिटास महासनस्वती (यूएनएमएएस), देनपसार, बाली (इंडोनेशिया) के बीच वैश्विक शैक्षणिक, अनुसंधान एवं नवाचार सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू), मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) तथा इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट ऑन कोलैबोरेशन (आईएसी) पर ऑनलाइन हस्ताक्षर किए गए।

कार्यक्रम में सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और यूएनएमएएस के रेक्टर सहित दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण, गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, नवाचार, ज्ञान-साझाकरण तथा छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई गई।

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं अकादमिक सहयोग प्रकोष्ठ (आईआरएसी) के तत्वावधान में आयोजित किया गया। आईआरएसी सेल की निदेशक डॉ. शिल्पा कायस्थ ने विश्वविद्यालय की वैश्विक सहभागिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के सफल संचालन और समन्वय में डॉ. विशाल अवस्थी, डॉ. वी. श्रीहर्षा राचापुडी, डॉ. नेहा तिवारी और डॉ. विकास सैनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित ज्ञान-साझाकरण व्याख्यान श्रृंखला में सीएसजेएमयू के प्रो. दीपक वर्मा ने “अकादमिक एडवांसमेंट थ्रू इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती प्रौद्योगिकियों और डिजिटल नवाचारों के माध्यम से उच्च शिक्षा में हो रहे बदलावों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं यूएनएमएएस के प्रो. आई डेवा माडे आदि बास्करा जोनी ने “रूरल स्मार्टनेस” विषय पर व्याख्यान देते हुए ग्रामीण विकास, सामुदायिक नवाचार और स्मार्ट तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखे।

यूआईईटी के निदेशक प्रो. आलोक कुमार ने इस साझेदारी का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने और शोध करने के नए अवसर मिलेंगे। कार्यक्रम में दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, डीन, अंतरराष्ट्रीय कार्यालय के प्रतिनिधि, संकाय सदस्य, शोधार्थी और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। दोनों संस्थानों ने विश्वास जताया कि यह समझौता भारत और इंडोनेशिया के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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