सीएसजेएमयू में ‘कलाकृति’ कार्यशाला, पारंपरिक कला से जुड़ रहे छात्र : डॉ. अंशु सिंह

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सीएसजेएमयू में ‘कलाकृति’ कार्यशाला, पारंपरिक कला से जुड़ रहे छात्र : डॉ. अंशु सिंह


कानपुर, 19 मार्च (हि.स.)। पारंपरिक कला न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं, बल्कि ये नई पीढ़ी को रचनात्मकता और जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं।” छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में ‘धरोहर 2026’ के अंतर्गत आयोजित ‘कलाकृति’ कार्यशाला में छात्रों ने विभिन्न लोक कलाओं की बारीकियों को करीब से जाना और व्यावहारिक रूप से उन्हें सीखने का अवसर मिला। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को सशक्त करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। यह बातें गुरुवार को डॉ. अंशु सिंह ने कहीं।

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ क्रिएटिव्स एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स में ‘धरोहर 2026’ के तहत ‘कलाकृति’ नामक धरोहर कला कार्यशाला का आयोजन किया गया। सप्ताहभर चलने वाले इस उत्सव का उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली को व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाना है।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी चित्रकला, महाराष्ट्र की वारली कला और मध्य प्रदेश की गोंड कला के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। छात्रों ने इन कला विधाओं की तकनीकों के साथ-साथ उनसे जुड़े सांस्कृतिक प्रतीकों, परंपराओं और इतिहास को भी समझा।

कार्यक्रम में मास्टर कारीगरों ने छात्रों को पारंपरिक कला के सूक्ष्म पहलुओं से अवगत कराया, जिससे उन्हें इन कलाओं को व्यवहारिक रूप से सीखने का अवसर मिला। आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक कला को आधुनिक रचनात्मकता से जोड़ते हुए नई पीढ़ी में इसके प्रति रुचि विकसित करना रहा।

कार्यक्रम का समन्वय ‘एनईपी सारथी’ टीम द्वारा किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और पारंपरिक कला के प्रति उत्साह दिखाया। आयोजन को विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक जागरूकता और रचनात्मकता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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