सीएसजेएमयू दीक्षांत समारोह में 82 प्रतिशत पदक बेटियों के नाम, 1.07 लाख विद्यार्थियों को उपाधि

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सीएसजेएमयू दीक्षांत समारोह में 82 प्रतिशत पदक बेटियों के नाम, 1.07 लाख विद्यार्थियों को उपाधि


कानपुर, 09 जुलाई (हि.स.)। पढ़ाई के साथ कोई न कोई हुनर अवश्य सीखें और अपने ज्ञान का उपयोग देश व समाज की सेवा में करें। जीवन में चाहे कितनी भी ऊंचाई हासिल करें, अपने संस्कार, माता-पिता और सामाजिक जिम्मेदारियों को कभी न भूलें। यह बातें गुरुवार को सीएसजेएमयू के 41वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) का 41वां दीक्षांत समारोह वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि एआईसीटीई के अध्यक्ष एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश कुमार सिंह रहे। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस वर्ष विश्वविद्यालय ने 1,07,713 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। इनमें 57,348 छात्राएं और 50,365 छात्र शामिल रहे। कुल 92 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि मिली, जिनमें 50 छात्राएं और 42 छात्र थे। पदक वितरण में छात्राओं का दबदबा रहा। कुल 96 पदक 51 विद्यार्थियों को प्रदान किए गए, जिनमें 42 छात्राओं और नौ छात्रों को पदक मिले। कुलाधिपति ने मंच पर 25 मेधावी विद्यार्थियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में परिसर में विद्यार्थियों की संख्या में 131.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने डिजिटल प्रशासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पहल, सतत विकास, योग, खेल और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं की प्रशंसा की। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी डिग्रियां डिजिलॉकर से डाउनलोड करने, कौशल आधारित शिक्षा अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बेटियों से विवाह के बाद भी शिक्षा और करियर जारी रखने की अपील की।

मुख्य अतिथि प्रो. योगेश कुमार सिंह ने कहा कि डिग्री केवल शिक्षा का प्रमाण है, जबकि व्यक्ति का चरित्र उसकी वास्तविक पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों से नेतृत्व क्षमता विकसित करने, चुनौतियों का सामना करने और विदेश में अनुभव प्राप्त करने के बाद भारत लौटकर देश के विकास में योगदान देने की अपील की।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से माता-पिता और गुरुओं के योगदान को याद रखने तथा राष्ट्रहित में अपनी क्षमता का उपयोग करने का आह्वान किया। वहीं, राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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