डिजिटल युग में विश्वसनीयता और नैतिक सरोकार सबसे बड़ी चुनौती : पदुम नारायण द्विवेदी

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डिजिटल युग में विश्वसनीयता और नैतिक सरोकार सबसे बड़ी चुनौती : पदुम नारायण द्विवेदी


कानपुर, 30 मई (हि.स.)। डिजिटल युग में पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता और नैतिक सरोकारों को बनाए रखने की है। किसी भी खबर को प्रसारित करने से पहले तथ्यों की जांच करना आवश्यक है, क्योंकि सोशल मीडिया के दौर में छोटी सी गलती भी बड़े सामाजिक तनाव का कारण बन सकती है। यह बातें शनिवार को उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त पदुम नारायण द्विवेदी ने सीएसजेएमयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस के 200 वर्ष पूरे होने पर आयोजित विशेष व्याख्यान में कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से शनिवार को आयोजित आभासी कार्यक्रम में पदुम नारायण द्विवेदी मुख्य वक्ता रहे, जबकि अध्यक्षता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की। कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्ष की यात्रा, मीडिया की बदलती भूमिका, नैतिक मूल्यों और तकनीकी चुनौतियों पर चर्चा की गई।

द्विवेदी ने 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय पत्रकारिता एक मिशन थी, जिसका उद्देश्य समाज को जागरूक करना और राष्ट्रहित में कार्य करना था। उन्होंने कहा कि आज सूचना के विस्फोट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारों की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है।

उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार और मीडिया एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने छात्रों से तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता अपनाने का आह्वान किया।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि मीडिया और जनसंचार शिक्षा में तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व दिया जा रहा है। विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि पत्रकारिता तेजी से डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ रही है और इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ने की सलाह दी।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने राज्य सूचना आयुक्त से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ उत्तर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरिओम कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ओमशंकर गुप्ता ने दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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