गर्मियों में मौसमी फल और सब्जियों का अधिक करें सेवन : डॉ. वंदना पाठक

गर्मियों में मौसमी फल और सब्जियों का अधिक करें सेवन : डॉ. वंदना पाठक
गर्मियों में मौसमी फल और सब्जियों का अधिक करें सेवन : डॉ. वंदना पाठक


कानपुर, 10 जून (हि.स.)। सूरज की आग उगलती लपटों से लोगों का जीना दुश्वार हो रहा है और ऐसे भीषण गर्मी में खानपान का विशेष ख्याल रखना चाहिये ताकि लू से बचा जा सके। इस भीषण गर्मी के मौसम में बच्चों को मौसम के अनुसार फल और सब्जियों का अधिक सेवन कराएं।

इस समय खरबूज, तरबूज, खीरा, ककड़ी नारियल पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। सब्जियों में पेठा, परवल, तौरी, लौकी, मूंग की दाल को सेवन लाभदायक है। फ्रिज का पानी पीने से परहेज करें एव घड़े या सुराही का उपयोग बेहतर रहेगा। साथ ही अभी सत्तू को ठंडे पानी एवं मिश्री के साथ थोड़ा-थोड़ा घोलकर पीना लाभकारी रहेगा। शड़ंग पानी, आम पना इस मौसम के लिए अच्छा है। मसालेदार भोजन से अवश्य बचे। धूप से खुद को बचाएं एवं अधिक व्यायाम से बचे। यह बातें सोमवार को वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने बच्चों को स्वर्ण प्राशन कराते हुए कही।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के स्कूल आफ हेल्थ साइंसेज अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य केन्द्र, राजकीय बाल गृह और आरोग्य क्लीनिक द्वारा लाल बंगले में स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें 110 बच्चों ने भाग लिया। यहां पर बच्चों का निःशुल्क रूप से स्वर्णप्राशन कराया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक, डॉ. निरंकार गोयल, डा. प्रवीन कटियार, आदि ने दीप प्रज्वलन व धन्वन्तरि पूजन के साथ किया।

वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डा0 वंदना पाठक ने उपस्थित अभिभावकों और लोगों को ग्रीष्म ऋतु के अनुसार आहार-विहार और बच्चों में कुपोषण जनित रोगों पर विशेष रूप से ध्यान देने का परामर्श दिया।

उन्होंने स्वर्णप्राशन संस्कार के बारे में बताते हुए कहा कि आयुर्वेद की यह विधा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी कारगर है। संस्कार की महत्ता बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रचलित 16 संस्कारों में से एक संस्कार है। यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक विकास में विशेष योगदान करता है। जिन बच्चों में यह संस्कार नियमित रूप होता है, उनमें मौसम और वातावरणीय प्रभाव के कारण होने वाली समस्याएं अन्य बच्चों क अपेक्षा कम देखी गयी हैं। स्वर्णप्राशन में प्रयुक्त होने वाली औषधि स्वर्ण भस्म, वच, गिलोय, ब्राह्मी, गौघृत, मधु आदि द्रव्यों के सम्मिश्रण से बनाया जाता है।

हिन्दुस्थान समाचार/अजय/राजेश

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