तकनीकी पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेश अत्यंत आवश्यक : डॉ अतुल कोठारी

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तकनीकी पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेश अत्यंत आवश्यक : डॉ अतुल कोठारी


तकनीकी पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेश अत्यंत आवश्यक : डॉ अतुल कोठारी


- भारतीय ज्ञान परम्परा को आईआईआईटी पाठ्यक्रम में समाहित करने पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

प्रयागराज, 26 अप्रैल (हि.स)। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) इलाहाबाद में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय ज्ञान निधि (बीकेटी) को देश के समस्त ट्रिपल आईटी पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों को चिन्हित करने के साथ ही रविवार को झलवा परिसर में समापन हुआ। इस अवसर पर सहभागी संस्थानों के बीच निकट भविष्य में सभी ट्रिपल आईटी में भारतीय ज्ञान निधि को शामिल करने के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार कर उसे लागू करने पर व्यापक सहमति बनी।

समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए डॉ. अतुल कोठारी ने आधुनिक शिक्षा को भारत की बौद्धिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेश एक समग्र, संदर्भ आधारित एवं वैश्विक रूप से प्रासंगिक शिक्षा मॉडल विकसित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ट्रिपल आईटी के निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावाने ने सभी सहभागी निदेशकों, विशेषज्ञों और संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने संगोष्ठी के निष्कर्षों को आगे बढ़ाने तथा अन्य ट्रिपल आईटी के साथ मिलकर प्रस्तावित ढांचे को मूर्त रूप देने के लिए अपने संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। इस संगोष्ठी में देश के समस्त भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों एवं सहयोगी संस्थानों के निदेशक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और नीति विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान आधुनिक तकनीकी शिक्षा में भारत की समृद्ध ज्ञान परम्पराओं को समाहित करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

ट्रिपल आईटी के पीआरओ डॉ पंकज मिश्र ने बताया कि समापन दिवस की प्रमुख विशेषता राउंड टेबल रही, जिसके अंतर्गत विषय-विशेष अकादमिक समूहों का गठन किया गया। इन समूहों को विभिन्न विषयों में भारतीय ज्ञान निधि को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए व्यावहारिक एवं क्रियान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उन्होंने बताया कि संगोष्ठी में कई विषयगत क्षेत्रों की पहचान की गई, जिनमें कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स (पाणिनीय व्याकरण, एनएलपी, एलएलएम पर विशेष फोकस), शासन एवं अर्थशास्त्र, ब्लॉकचेन एवं प्राचीन आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, प्राचीन एवं वैदिक गणित, खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी, सामग्री, डिजाइन एवं विनिर्माण, संज्ञानात्मक विज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य तथा लिबरल-परफॉर्मिंग आर्ट्स एवं डिजिटल ह्यूमैनिटीज शामिल हैं।

प्रत्येक विषय समूह ने गहन चर्चा करते हुए व्यावहारिक रणनीतियां विकसित कीं। इनमें संभावित पाठ्यक्रम शीर्षक, अनिवार्य बहु-विषयक माइनर कोर्स, ओपन इलेक्टिव, ऑडिट आधारित एड-ऑन कोर्स तथा मौजूदा पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान निधि मॉड्यूल को शामिल करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। साथ ही, प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी ट्रिपल आईटी के बीच सहयोगात्मक शैक्षणिक मॉडल पर भी बल दिया गया।

उन्होंने बताया कि दो दिवसीय संगोष्ठी में कुल 25 ट्रिपल आईटी ने प्रतिभाग किया। देश भर के 11 ट्रिपल आईटी के निदेशकों ने अपने विचार साझा किए और शीघ्र ही सभी संस्थान अपने-अपने मॉड्यूल को अंतिम रूप देकर इसे लागू करेंगे। कार्यक्रम के दौरान कुलसचिव प्रो. मंदार सुभाष कार्यकर्ते ने संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जबकि प्रो. संजय सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर एमएनएनआईटी के निदेशक प्रो. आर.एस. वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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