शादी से पहले संवाद जरूरी, ताकि रिश्ते में न पड़े गांठ : जिलाधिकारी

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शादी से पहले संवाद जरूरी, ताकि रिश्ते में न पड़े गांठ : जिलाधिकारी


कानपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। विवाह जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय है। सफल वैवाहिक जीवन के लिए भावी दंपति के बीच आपसी संवाद, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारियों की स्पष्ट समझ जरूरी है। छोटी असहमतियां समय पर संवाद और उचित मार्गदर्शन के अभाव में गंभीर विवाद का रूप ले सकती हैं। यह बातें सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गोल चौराहे के निकट वन स्टॉप सेंटर में राष्ट्रीय महिला आयोग की पहल पर स्थापित ‘तेरे मेरे सपने’ प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर के शुभारंभ के दौरान कहीं।

विवाह के बाद छोटी-छोटी असहमतियां संवाद के अभाव में गंभीर पारिवारिक विवाद का रूप न लें, इसके लिए भावी युगलों को शादी से पहले ही बेहतर वैवाहिक जीवन की समझ दी जाएगी। केंद्र पर जिन युवक-युवतियों का विवाह तय हो चुका है अथवा जो विवाह करने जा रहे हैं, उन्हें सफल वैवाहिक जीवन से जुड़ी जिम्मेदारियों और चुनौतियों के संबंध में विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलेगा।

हाल के वर्षों में विवाह के शुरुआती दौर में ही पति-पत्नी के बीच मतभेद और अलगाव के मामले सामने आ रहे हैं। संवाद की कमी, एक-दूसरे से अलग अपेक्षाएं, आर्थिक विषयों पर असहमति और पारिवारिक परिस्थितियों को न समझ पाने के कारण कई बार छोटी असहमति गंभीर विवाद में बदल जाती है। ऐसे में विवाह से पहले भावी दंपती के बीच स्पष्ट और सकारात्मक संवाद मजबूत वैवाहिक जीवन की नींव बन सकता है।

जनपद की फैमिली कोर्टों में वर्तमान में 15 हजार से अधिक पारिवारिक वाद विचाराधीन हैं। इनमें अधिकांश मामले वैवाहिक विवाद और तलाक से संबंधित हैं। ‘तेरे मेरे सपने’ केंद्र के माध्यम से भावी युगलों को विवाह से जुड़ी वास्तविक जिम्मेदारियों और संभावित चुनौतियों के प्रति पहले से जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।

केंद्र पर आपसी संवाद, परस्पर सम्मान, भावनात्मक समझ, आर्थिक नियोजन, परिवार के प्रति जिम्मेदारियों, विवाह के बाद बदलती भूमिकाओं और एक-दूसरे की अपेक्षाओं को लेकर मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसके अलावा मतभेदों के स्वस्थ समाधान तथा वैवाहिक अधिकारों और दायित्वों की जानकारी भी दी जाएगी। उन्हें यह भी बताया जाएगा कि असहमति की स्थिति में संवाद कैसे बनाए रखें और छोटी समस्याओं को गंभीर पारिवारिक विवाद बनने से कैसे रोकें।

गोल चौराहे के निकट स्थित वन स्टॉप सेंटर में प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को पूरी तरह निःशुल्क परामर्श दिया जाएगा। वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी बंदना द्विवेदी और अधिवक्ता दिशा अरोड़ा भावी युगलों को काउंसलिंग देंगी। काउंसलिंग के दौरान साझा की जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और संबंधित युगलों की निजता सुरक्षित रहेगी।

काउंसलिंग का उद्देश्य किसी रिश्ते के संबंध में निर्णय देना नहीं, बल्कि भावी दंपती को समझदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ वैवाहिक जीवन शुरू करने के लिए तैयार करना है। राष्ट्रीय महिला आयोग की यह पहल वैवाहिक विवाद उत्पन्न होने के बाद समाधान तलाशने के बजाय विवाह से पहले ही युवक-युवतियों को संवाद, सामंजस्य और जिम्मेदारियों की समझ देने पर केंद्रित है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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