रोजगार सृजन का प्रमुख साधन है डेयरी क्षेत्र : मुकेश मेश्राम

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रोजगार सृजन का प्रमुख साधन है डेयरी क्षेत्र : मुकेश मेश्राम


लखनऊ, 18 अप्रैल(हि.स.)। दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के पर विभाग द्वारा शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में दो दिवसीय दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026 का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विभाग के 50 वर्ष पूर्ण करने के पावन अवसर पर विभाग के नाम प्रेषित शुभकामना संदेश को पढ़कर सुनाया गया।

महोत्सव में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि डेयरी क्षेत्र रोजगार सृजन का प्रमुख साधन है। दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने, स्वरोजगार को बढ़ाने, दुधारू पशुओं के पालन एवं गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादों को आमजन तक सुगमता से उपलब्ध कराने के लिए दुग्ध विकास विभाग प्रतिबद्ध है। प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाए जाने में दुग्ध विकास विभाग के महत्वपूर्ण भूमिका है।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि भारतीय गोवंशीय देशी गाय के दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। दुग्ध विकास विभाग तकनीक और नवाचार से किसानों और पशुपालकों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रचार प्रसार के माध्यम से निरंतर जागरूक कर रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को और अधिक बढ़ाने, दुग्ध उत्पादकों की आय दोगुनी करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में अपनी विभाग अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

अपर मुख्य सचिव द्वारा अपने संबोधन में वर्तमान परिदृश्य में स्वदेशी नस्ल के गौपालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए उपस्थित दुग्ध उत्पादकों / कृषकों को दुग्ध विकास विभाग में संचालित विभिन्न योजनाओं के बहुआयामी लाभों पर प्रकाश डालते हुए इन योजनाओं से पशुपालकों/गौपालकों के जीवन स्तर में आने वाले बदलावों से अवगत कराया गया।

इस अवसर पर धनलक्ष्मी के०, दुग्ध आयुक्त द्वारा प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनाये रखने के संकल्प के साथ सम्बोधन प्रारम्भ कर मुख्यमंत्री, उ०प्र०सरकार की प्रयासों से भी सभी आये दुग्ध उत्पादकों को अवगत कराया। उनके द्वारा सबका साथ-सबका विकास के साथ दुग्ध विभाग के प्रयास के साथ जोड़कर प्रदेश को अग्रणी राज्य कैसे बनाये रखेंगे इस पर विस्तृत व्याख्या की गयी, जिसमें उत्तर प्रदेश डेयरी सेक्टर आज सिर्फ कॉपरेटिव तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राइवेट डेयरियाँ द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किये गये हैं। राज्य सरकार ने संगठित व्यवस्था के द्वारा किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और स्थायी आय प्रदान की है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्राप्त हुआ है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय

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