जेम पर यूपी की उपलब्धि को सीएम योगी ने सराहा, तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर दी बधाई

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शासकीय खरीद में पारदर्शिता और समावेशिता के लिए प्रदेश को मिला राष्ट्रीय सम्मान

जेम पर अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की प्रदेश सरकार की खरीद, एमएसई की भागीदारी ₹55,972 करोड़ से अधिक

चालू वित्तीय वर्ष में सरकारी खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी बढ़कर 59 प्रतिशत, यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत

महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमों और स्टार्टअप्स की भी जेम पर बढ़ी भागीदारी

लखनऊ, 01 सितंबर। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के माध्यम से शासकीय खरीद में पारदर्शिता एवं समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश को मिली राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सराहना की है। प्रदेश को जेम पर श्रेष्ठ योगदान के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मंगलवार को एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल एवं स्टेट जेम नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने मुख्यमंत्री से भेंट कर उन्हें इस उपलब्धि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उल्लेखनीय है कि जेम के माध्यम से प्रदेश सरकार ने प्रारंभ से अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की शासकीय खरीद की है। इसमें ₹55,972 करोड़ से अधिक की खरीद एमएसई से हुई है। इस प्रकार कुल शासकीय खरीद में एमएसई की भागीदारी 55 प्रतिशत से अधिक रही है। मुख्यमंत्री ने जेम के माध्यम से सरकारी खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ छोटे उद्यमों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की।

तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से यूपी का सम्मान
जेम पर उत्तर प्रदेश की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। विगत दिनों नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जेम के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश को मिले पुरस्कारों में, जेम ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट जेम प्रोक्योरमेंट वैल्यू और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड शामिल हैं। इन पुरस्कारों को एमएसएमई के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने प्राप्त किया।

चार साल में 43 से बढ़कर 59 प्रतिशत हुई एमएसई की हिस्सेदारी
वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक जेम के माध्यम से प्रदेश की कुल ₹7,235 करोड़ की शासकीय खरीद हुई। इसमें एमएसई (पैन इंडिया) से ₹4,253 करोड़, यानी 59 प्रतिशत की खरीद की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश के अपने उद्यमों की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत, यानी ₹3,646 करोड़ रही। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल ₹22,337 करोड़ की जेम खरीद में एमएसई (पैन इंडिया) से ₹12,181 करोड़ यानी 55 प्रतिशत की खरीद हुई थी, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 82 प्रतिशत यानी ₹9,976 करोड़ रही। 

वर्ष 2024-25 में ₹16,830 करोड़ की कुल जेम खरीद में एमएसई का योगदान ₹8,952 करोड़ यानी 53 प्रतिशत था, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत यानी ₹7,264 करोड़ रही। इसी तरह 2023-24 में कुल ₹20,248 करोड़ की जेम खरीद में एमएसई से ₹8,771 करोड़ यानी 43 प्रतिशत की खरीद हुई थी, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत यानी ₹6,680 करोड़ थी। इस तरह चार वर्षों में जेम पर कुल सरकारी खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई है। एमएसई से हुई इस खरीद में प्रदेश के अपने उद्यमों की हिस्सेदारी भी 76 प्रतिशत से बढ़कर 86 प्रतिशत पहुंच गई है।

महिला, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मिला अवसर
जेम ने उत्तर प्रदेश के छोटे उद्यमियों को प्रदेश की सीमाओं से बाहर देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच उपलब्ध कराई है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक प्रदेश के एमएसई को जेम के माध्यम से ₹16,953 करोड़ का कुल कारोबार मिला। इसमें महिला उद्यमियों को ₹2,202 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹255 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹2,360 करोड़ का कारोबार प्राप्त हुआ। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के छोटे उद्यमियों को जेम से ₹27,235 करोड़ का कारोबार मिला था। इसमें महिला उद्यमियों को ₹4,755 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹752 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹3,203 करोड़ का कारोबार प्राप्त हुआ। इसी तरह, वर्ष 2024-25 में सभी एमएसई को ₹21,275 करोड़ का कारोबार मिला, जिसमें महिला उद्यमियों का हिस्सा ₹3,310 करोड़, एससी/एसटी का ₹507 करोड़ और स्टार्टअप्स का ₹2,139 करोड़ था। 2023-24 में एमएसई को ₹18,230 करोड़ का कारोबार मिला था, जिसमें महिला उद्यमियों को ₹2,583 करोड़, एससी/एसटी को ₹438 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹2,435 करोड़ का कारोबार मिला।

योगी सरकार की समावेशी खरीद नीति का दिख रहा असर
जेम के यूपी स्टेट नोडल और डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि प्रदेश में एमएसई को सरकारी खरीद में अधिक अवसर देने के लिए योगी सरकार ने 26 नवंबर 2024 को शासनादेश जारी कर समावेशी सरकारी खरीद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया था। इसके बाद जेम पर एमएसई की भागीदारी और खास तौर पर उत्तर प्रदेश के एमएसई से होने वाली सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। सरकार का फोकस छोटे उद्यमों के साथ महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी सरकारी बाजार से जोड़ने पर है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार बढ़ने के साथ उद्यमिता और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। योगी सरकार जेम को ई-गवर्नेंस, पारदर्शी सरकारी खरीद और स्थानीय उद्यमों को बाजार उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रही है। एक तरफ सरकारी विभागों को प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए उत्पाद और सेवाएं खरीदने का विकल्प मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के छोटे उद्यमों, महिलाओं, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को बड़े सरकारी बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

₹6.39 करोड़ के प्लॉट-शेड की नीलामी से मिले ₹32.54 करोड़
जेम सरकारी खरीद के साथ सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर मूल्य दिलाने का भी माध्यम बन रहा है। इसका बड़ा उदाहरण कानपुर में एमएसएमई विभाग के औद्योगिक प्लॉट और शेड की नीलामी में सामने आया। उद्योग निदेशालय, कानपुर ने 13 से 21 जुलाई 2026 के बीच औद्योगिक आस्थानों के 34 औद्योगिक प्लॉट एवं शेड की 99 वर्ष की लीज के लिए नीलामी की। इनका अपेक्षित/आरक्षित मूल्य ₹6.39 करोड़ था। प्रतिस्पर्धी बोली के बाद इनका विक्रय मूल्य ₹32.54 करोड़ पहुंच गया। इससे सरकार को आरक्षित मूल्य की तुलना में ₹26.15 करोड़ की अतिरिक्त आय हुई। प्राप्त मूल्य आरक्षित मूल्य से 409 प्रतिशत अधिक रहा। यह नीलामी डिजिटल और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर मूल्य हासिल करने का उदाहरण बनी है।

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