आठ राज्यों से आए कलाकारों से सीएम योगी ने किया संवाद, सम्मानित कर दिया एकता का संदेश

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 विविधता में एकता ही भारत की ताकत, कलाकार परंपरा और लोक संस्कृति के वाहक : मुख्यमंत्री योगी

कलाकारों ने जताई अयोध्या-लखनऊ घूमने की इच्छा, सीएम ने अधिकारियों को दिए निर्देश

कुलभूषण चंद्राकर, बोले- छत्तीसगढ़ में उन्हें बुलडोजर बाबा के नाम से जाना जाता 

आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं: सीएम

जम्मू-कश्मीर की श्रुति ने श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा जताई, सीएम ने अधिकारियों को दिए निर्देश 

लखनऊ, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विधानभवन के बाहर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले यूपी समेत विभिन्न राज्यों के कलाकारों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अपने सरकारी आवास पर संवाद किया और उन्हें सम्मानित किया। जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश और गुजरात से लेकर छत्तीसगढ़ तक आठ राज्यों के कलाकारों ने अपनी लोक संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। सीएम ने इन कलाकारों से उत्तर प्रदेश में उनके अनुभव और यहां घूमने की इच्छा के बारे में जानकारी ली।  

संवाद के दौरान कई कलाकारों ने अयोध्या और लखनऊ घूमने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को उनके भ्रमण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कलाकारों से कहा कि जब भी किसी राज्य में जाएं तो एक दिन अतिरिक्त समय निकालकर स्थानीय स्थलों, संस्कृति और खान-पान को जरूर जानें। हर भारतीय का दायित्व है कि वह अपने देश की विशालता और विविधता को देखे। सीएम ने कहा कि कलाकारों के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति एक-दूसरे से जुड़ती है और यही सांस्कृतिक एकता भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

बुलडोजर बाबा कहने पर मुस्कुराए सीएम योगी

छत्तीसगढ़ के कुलभूषण चंद्राकर ने मुख्यमंत्री को बताया कि करीब 15 वर्ष पहले उन्हें अयोध्या जाने का अवसर मिला था, लेकिन अब वह नई अयोध्या देखने के लिए उत्सुक हैं। सीएम ने कहा कि तब की अयोध्या और आज की अयोध्या में जमीन-आसमान का अंतर है। आज की अयोध्या त्रेता युग का स्मरण कराती है। कुलभूषण ने कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री योगी को 'बुलडोजर बाबा' के नाम से जाना जाता है। इस पर मुख्यमंत्री मुस्कुराए और कहा कि बुलडोजर पसंद है ना आपको? आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन कम से कम गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं।

1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और केजीबीवी में गूंजा- ‘भारत माता की जय’  - लगभग 1.48 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में लिया हिस्सा  - गीत, कविता, नृत्य, नाटक, तिरंगा रैली, वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं से जीवंत हुई स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा  - केजीबीवी की छात्राओं ने शिक्षा, सशक्तीकरण और राष्ट्रनिर्माण में बेटियों की भूमिका का दिया संदेश  - अभिभावकों और ग्रामीणों की सहभागिता से विद्यालयों में स्वतंत्रता दिवस बना जनभागीदारी का उत्सव  लखनऊ, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब प्रदेश के 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एक साथ ‘भारत माता की जय’ के जयघोष गूंजे, तो तिरंगे की छांव में नई पीढ़ी का राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प एक साथ दिखाई दिया। स्वतंत्रता दिवस 2026 पर लगभग 1.41 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदेमातरम् के सामूहिक गायन में सहभागिता की।   सुबह से ही विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगे रहे। तिरंगे, फूलों और रंग-बिरंगी सजावट के बीच बच्चों ने गीत, कविता, नृत्य, नाटक और तिरंगा रैली के माध्यम से आजादी के अमर नायकों के त्याग और बलिदान को याद किया। तिरंगे को सलामी देते बच्चों का उत्साह और ‘भारत माता की जय’ के जयघोष ने स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को भावनात्मक और राष्ट्रप्रेरक स्वर दिया। इन आयोजनों ने यह संकल्प भी मजबूत किया कि शिक्षा से सशक्त नई पीढ़ी ही विकसित, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव तैयार करेगी।  राज्य स्तर पर भी शान से लहराया राष्ट्रध्वज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय/शिक्षा निदेशक (बेसिक) कैंप कार्यालय में महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी एवं शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह का संदेश पढ़कर सुनाया गया। संदेश में शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का सशक्त माध्यम बनाते हुए बच्चों के उज्ज्वल, सक्षम और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण के संकल्प को रेखांकित किया गया।  शैक्षिक संस्थानों में अमर शहीदों को नमन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में निदेशक गणेश कुमार तथा राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान में निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को नमन किया। संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान, प्रशासनिक अधिकारी लव कुमार की उपस्थिति में इस अवसर पर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्वतंत्रता दिवस के महत्व को स्मरण किया गया। राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।  देशभक्ति के रंग में रंगे विद्यालय प्रदेशभर के विद्यालयों में देशभक्ति गीत, नृत्य, कविताओं और नाटकों की प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवगाथा को जीवंत किया। विभिन्न विद्यालयों में तिरंगा रैलियां निकाली गईं। वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, राष्ट्रीय मूल्यों और देश के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ा गया। विद्यालय प्रांगणों में बच्चों की प्रस्तुतियों और सामूहिक गतिविधियों ने स्वतंत्रता दिवस को महज एक औपचारिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सीख, सहभागिता और राष्ट्रप्रेम के उत्सव में बदल दिया।  बेटियों ने दिया राष्ट्रनिर्माण का संदेश प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं ने विशेष उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया। गीत, कविता और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य और बलिदान को याद किया। छात्राओं की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि बेटियां शिक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रनिर्माण की अग्रिम पंक्ति में अपनी भूमिका निभा रही हैं।  विद्यालय बने जनभागीदारी के केंद्र स्वतंत्रता दिवस समारोह में बच्चों के साथ अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इससे विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम सामुदायिक उत्सव का रूप लेते दिखाई दिए। गांव से शहर तक विद्यालय परिसरों में तिरंगे के नीचे एकता, भाईचारे, प्रेम और देशभक्ति का संदेश गूंजता रहा।

श्रेष्ठ भारत के लिए एकता और सुरक्षा दोनों जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से कलाकारों का एक मंच पर आना ही भारत की विविधता और सांस्कृतिक एकता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि यही एक भारत श्रेष्ठ भारत है। बंगाल से महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी, अरुणाचल प्रदेश से द्वारिका-पुरी तक जब सभी एक-दूसरे से जुड़ेंगे, तभी एक भारत श्रेष्ठ भारत का संकल्प साकार होगा। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ भारत के लिए एकता और सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। अरुणाचल प्रदेश की नीलम से बातचीत करते हुए सीएम ने लखनऊ के अनुभव पूछे और अयोध्या सहित भगवान बुद्ध से जुड़े उत्तर प्रदेश के स्थलों को देखने की सलाह दी। बिहार के सुबोध से कहा कि आप लोगों को अयोध्या जरूर जाना चाहिए, क्योंकि मां जानकी का संबंध भी उस पावन भूमि से है। मध्य प्रदेश के लेखपाल धुर्वे से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भले ही आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन कलाकारों के आने से मां नर्मदा का संदेश भी यहां पहुंचता है।

1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और केजीबीवी में गूंजा- ‘भारत माता की जय’  - लगभग 1.48 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में लिया हिस्सा  - गीत, कविता, नृत्य, नाटक, तिरंगा रैली, वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं से जीवंत हुई स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा  - केजीबीवी की छात्राओं ने शिक्षा, सशक्तीकरण और राष्ट्रनिर्माण में बेटियों की भूमिका का दिया संदेश  - अभिभावकों और ग्रामीणों की सहभागिता से विद्यालयों में स्वतंत्रता दिवस बना जनभागीदारी का उत्सव  लखनऊ, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब प्रदेश के 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एक साथ ‘भारत माता की जय’ के जयघोष गूंजे, तो तिरंगे की छांव में नई पीढ़ी का राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प एक साथ दिखाई दिया। स्वतंत्रता दिवस 2026 पर लगभग 1.41 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदेमातरम् के सामूहिक गायन में सहभागिता की।   सुबह से ही विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगे रहे। तिरंगे, फूलों और रंग-बिरंगी सजावट के बीच बच्चों ने गीत, कविता, नृत्य, नाटक और तिरंगा रैली के माध्यम से आजादी के अमर नायकों के त्याग और बलिदान को याद किया। तिरंगे को सलामी देते बच्चों का उत्साह और ‘भारत माता की जय’ के जयघोष ने स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को भावनात्मक और राष्ट्रप्रेरक स्वर दिया। इन आयोजनों ने यह संकल्प भी मजबूत किया कि शिक्षा से सशक्त नई पीढ़ी ही विकसित, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव तैयार करेगी।  राज्य स्तर पर भी शान से लहराया राष्ट्रध्वज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय/शिक्षा निदेशक (बेसिक) कैंप कार्यालय में महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी एवं शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह का संदेश पढ़कर सुनाया गया। संदेश में शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का सशक्त माध्यम बनाते हुए बच्चों के उज्ज्वल, सक्षम और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण के संकल्प को रेखांकित किया गया।  शैक्षिक संस्थानों में अमर शहीदों को नमन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में निदेशक गणेश कुमार तथा राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान में निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को नमन किया। संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान, प्रशासनिक अधिकारी लव कुमार की उपस्थिति में इस अवसर पर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्वतंत्रता दिवस के महत्व को स्मरण किया गया। राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।  देशभक्ति के रंग में रंगे विद्यालय प्रदेशभर के विद्यालयों में देशभक्ति गीत, नृत्य, कविताओं और नाटकों की प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवगाथा को जीवंत किया। विभिन्न विद्यालयों में तिरंगा रैलियां निकाली गईं। वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, राष्ट्रीय मूल्यों और देश के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ा गया। विद्यालय प्रांगणों में बच्चों की प्रस्तुतियों और सामूहिक गतिविधियों ने स्वतंत्रता दिवस को महज एक औपचारिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सीख, सहभागिता और राष्ट्रप्रेम के उत्सव में बदल दिया।  बेटियों ने दिया राष्ट्रनिर्माण का संदेश प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं ने विशेष उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया। गीत, कविता और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य और बलिदान को याद किया। छात्राओं की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि बेटियां शिक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रनिर्माण की अग्रिम पंक्ति में अपनी भूमिका निभा रही हैं।  विद्यालय बने जनभागीदारी के केंद्र स्वतंत्रता दिवस समारोह में बच्चों के साथ अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इससे विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम सामुदायिक उत्सव का रूप लेते दिखाई दिए। गांव से शहर तक विद्यालय परिसरों में तिरंगे के नीचे एकता, भाईचारे, प्रेम और देशभक्ति का संदेश गूंजता रहा।

जम्मू-कश्मीर की श्रुति ने श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा जताई

जम्मू-कश्मीर से पहली बार उत्तर प्रदेश आईं श्रुति ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने उनकी इच्छा पर सहमति जताते हुए अधिकारियों को व्यवस्था करने के निर्देश दिए। वाराणसी की सुनिधि पाठक ने दर्शन की बेहतर व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। इस पर सीएम ने कहा कि बाहर से आने वाले श्रद्धालु भारत की परंपरा में अतिथि हैं और अतिथि का सम्मान करना हमारा दायित्व है। गुजरात के पोरबंदर से आए राजू भाई से बातचीत में मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी की जन्मभूमि पोरबंदर और भगवान कृष्ण के सखा सुदामा से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख किया। पोरबंदर से कलाकारों का आना उनके लिए खुशी की बात है। महोबा के जितेंद्र कुमार की आल्हा प्रस्तुति की सराहना करते हुए सीएम ने कहा कि जब वह आल्हा गा रहे थे तो सभापति भी जोश में आ गए थे। उन्होंने कहा कि कलाकार आल्हा की वीर परंपरा को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और केजीबीवी में गूंजा- ‘भारत माता की जय’  - लगभग 1.48 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में लिया हिस्सा  - गीत, कविता, नृत्य, नाटक, तिरंगा रैली, वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं से जीवंत हुई स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा  - केजीबीवी की छात्राओं ने शिक्षा, सशक्तीकरण और राष्ट्रनिर्माण में बेटियों की भूमिका का दिया संदेश  - अभिभावकों और ग्रामीणों की सहभागिता से विद्यालयों में स्वतंत्रता दिवस बना जनभागीदारी का उत्सव  लखनऊ, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब प्रदेश के 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एक साथ ‘भारत माता की जय’ के जयघोष गूंजे, तो तिरंगे की छांव में नई पीढ़ी का राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प एक साथ दिखाई दिया। स्वतंत्रता दिवस 2026 पर लगभग 1.41 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदेमातरम् के सामूहिक गायन में सहभागिता की।   सुबह से ही विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगे रहे। तिरंगे, फूलों और रंग-बिरंगी सजावट के बीच बच्चों ने गीत, कविता, नृत्य, नाटक और तिरंगा रैली के माध्यम से आजादी के अमर नायकों के त्याग और बलिदान को याद किया। तिरंगे को सलामी देते बच्चों का उत्साह और ‘भारत माता की जय’ के जयघोष ने स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को भावनात्मक और राष्ट्रप्रेरक स्वर दिया। इन आयोजनों ने यह संकल्प भी मजबूत किया कि शिक्षा से सशक्त नई पीढ़ी ही विकसित, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव तैयार करेगी।  राज्य स्तर पर भी शान से लहराया राष्ट्रध्वज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय/शिक्षा निदेशक (बेसिक) कैंप कार्यालय में महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी एवं शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह का संदेश पढ़कर सुनाया गया। संदेश में शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का सशक्त माध्यम बनाते हुए बच्चों के उज्ज्वल, सक्षम और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण के संकल्प को रेखांकित किया गया।  शैक्षिक संस्थानों में अमर शहीदों को नमन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में निदेशक गणेश कुमार तथा राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान में निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को नमन किया। संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान, प्रशासनिक अधिकारी लव कुमार की उपस्थिति में इस अवसर पर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्वतंत्रता दिवस के महत्व को स्मरण किया गया। राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।  देशभक्ति के रंग में रंगे विद्यालय प्रदेशभर के विद्यालयों में देशभक्ति गीत, नृत्य, कविताओं और नाटकों की प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवगाथा को जीवंत किया। विभिन्न विद्यालयों में तिरंगा रैलियां निकाली गईं। वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, राष्ट्रीय मूल्यों और देश के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ा गया। विद्यालय प्रांगणों में बच्चों की प्रस्तुतियों और सामूहिक गतिविधियों ने स्वतंत्रता दिवस को महज एक औपचारिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सीख, सहभागिता और राष्ट्रप्रेम के उत्सव में बदल दिया।  बेटियों ने दिया राष्ट्रनिर्माण का संदेश प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं ने विशेष उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया। गीत, कविता और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य और बलिदान को याद किया। छात्राओं की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि बेटियां शिक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रनिर्माण की अग्रिम पंक्ति में अपनी भूमिका निभा रही हैं।  विद्यालय बने जनभागीदारी के केंद्र स्वतंत्रता दिवस समारोह में बच्चों के साथ अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इससे विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम सामुदायिक उत्सव का रूप लेते दिखाई दिए। गांव से शहर तक विद्यालय परिसरों में तिरंगे के नीचे एकता, भाईचारे, प्रेम और देशभक्ति का संदेश गूंजता रहा।

हर क्षेत्र व हर जनपद में महोत्सव होने चाहिए

मथुरा के राजेश प्रसाद शर्मा ने मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए कहा कि आज उनसे बात करके बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने मथुरा को तीन बड़े महोत्सव देने के लिए मुख्यमंत्री योगी का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाकार केवल गायन, वादन, नृत्य और नाटक करने वाले नहीं हैं, बल्कि वे परंपरा और लोक संस्कृति के वाहक हैं। कलाकारों की प्रस्तुतियों में अतीत छिपा होता है और भविष्य उसी अतीत से प्रेरणा लेता है। अयोध्या का दीपोत्सव और रामनवमी, बरसाना का रंगोत्सव, मथुरा में जन्माष्टमी, बुंदेलखंड में आल्हा की परंपरा और प्रयागराज के माघ मेले को नई ऊंचाई देने का उद्देश्य लोक परंपराओं को मजबूत करना है। हर क्षेत्र और हर जनपद में महोत्सव होने चाहिए, ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच मिले और लोक गाथाएं अगली पीढ़ी तक पहुंचें।

1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और केजीबीवी में गूंजा- ‘भारत माता की जय’  - लगभग 1.48 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में लिया हिस्सा  - गीत, कविता, नृत्य, नाटक, तिरंगा रैली, वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं से जीवंत हुई स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा  - केजीबीवी की छात्राओं ने शिक्षा, सशक्तीकरण और राष्ट्रनिर्माण में बेटियों की भूमिका का दिया संदेश  - अभिभावकों और ग्रामीणों की सहभागिता से विद्यालयों में स्वतंत्रता दिवस बना जनभागीदारी का उत्सव  लखनऊ, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब प्रदेश के 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एक साथ ‘भारत माता की जय’ के जयघोष गूंजे, तो तिरंगे की छांव में नई पीढ़ी का राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प एक साथ दिखाई दिया। स्वतंत्रता दिवस 2026 पर लगभग 1.41 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदेमातरम् के सामूहिक गायन में सहभागिता की।   सुबह से ही विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगे रहे। तिरंगे, फूलों और रंग-बिरंगी सजावट के बीच बच्चों ने गीत, कविता, नृत्य, नाटक और तिरंगा रैली के माध्यम से आजादी के अमर नायकों के त्याग और बलिदान को याद किया। तिरंगे को सलामी देते बच्चों का उत्साह और ‘भारत माता की जय’ के जयघोष ने स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को भावनात्मक और राष्ट्रप्रेरक स्वर दिया। इन आयोजनों ने यह संकल्प भी मजबूत किया कि शिक्षा से सशक्त नई पीढ़ी ही विकसित, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव तैयार करेगी।  राज्य स्तर पर भी शान से लहराया राष्ट्रध्वज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय/शिक्षा निदेशक (बेसिक) कैंप कार्यालय में महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी एवं शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह का संदेश पढ़कर सुनाया गया। संदेश में शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का सशक्त माध्यम बनाते हुए बच्चों के उज्ज्वल, सक्षम और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण के संकल्प को रेखांकित किया गया।  शैक्षिक संस्थानों में अमर शहीदों को नमन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में निदेशक गणेश कुमार तथा राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान में निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को नमन किया। संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान, प्रशासनिक अधिकारी लव कुमार की उपस्थिति में इस अवसर पर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्वतंत्रता दिवस के महत्व को स्मरण किया गया। राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।  देशभक्ति के रंग में रंगे विद्यालय प्रदेशभर के विद्यालयों में देशभक्ति गीत, नृत्य, कविताओं और नाटकों की प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवगाथा को जीवंत किया। विभिन्न विद्यालयों में तिरंगा रैलियां निकाली गईं। वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, राष्ट्रीय मूल्यों और देश के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ा गया। विद्यालय प्रांगणों में बच्चों की प्रस्तुतियों और सामूहिक गतिविधियों ने स्वतंत्रता दिवस को महज एक औपचारिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सीख, सहभागिता और राष्ट्रप्रेम के उत्सव में बदल दिया।  बेटियों ने दिया राष्ट्रनिर्माण का संदेश प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं ने विशेष उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया। गीत, कविता और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य और बलिदान को याद किया। छात्राओं की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि बेटियां शिक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रनिर्माण की अग्रिम पंक्ति में अपनी भूमिका निभा रही हैं।  विद्यालय बने जनभागीदारी के केंद्र स्वतंत्रता दिवस समारोह में बच्चों के साथ अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इससे विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम सामुदायिक उत्सव का रूप लेते दिखाई दिए। गांव से शहर तक विद्यालय परिसरों में तिरंगे के नीचे एकता, भाईचारे, प्रेम और देशभक्ति का संदेश गूंजता रहा।

राज्यों की लोक संस्कृति ने बांधा समां

कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के कलाकारों ने रउफ एवं डोंगरी नृत्य, महाराष्ट्र के कलाकारों ने नमन और डिंडी नृत्य, अरुणाचल प्रदेश ने पराई लोकनृत्य, त्रिपुरा ने डारलॉन्ग लोकनृत्य, बिहार ने झिंझिया लोकनृत्य, मध्य प्रदेश ने गुदुमबाजा लोकनृत्य, गुजरात ने तलवार रास, छत्तीसगढ़ ने रेला पाटा लोकनृत्य और उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने कथक की प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों और कोरियोग्राफर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कलाकारों ने उत्तर प्रदेश की व्यवस्था, सुंदरता और यहां मिले सम्मान की भी सराहना की। साथ ही अयोध्या और काशी में दर्शन की व्यवस्थाओं को लेकर कलाकारों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया।

1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और केजीबीवी में गूंजा- ‘भारत माता की जय’  - लगभग 1.48 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में लिया हिस्सा  - गीत, कविता, नृत्य, नाटक, तिरंगा रैली, वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं से जीवंत हुई स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा  - केजीबीवी की छात्राओं ने शिक्षा, सशक्तीकरण और राष्ट्रनिर्माण में बेटियों की भूमिका का दिया संदेश  - अभिभावकों और ग्रामीणों की सहभागिता से विद्यालयों में स्वतंत्रता दिवस बना जनभागीदारी का उत्सव  लखनऊ, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब प्रदेश के 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एक साथ ‘भारत माता की जय’ के जयघोष गूंजे, तो तिरंगे की छांव में नई पीढ़ी का राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प एक साथ दिखाई दिया। स्वतंत्रता दिवस 2026 पर लगभग 1.41 करोड़ बच्चों ने तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्रगान और वंदेमातरम् के सामूहिक गायन में सहभागिता की।   सुबह से ही विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगे रहे। तिरंगे, फूलों और रंग-बिरंगी सजावट के बीच बच्चों ने गीत, कविता, नृत्य, नाटक और तिरंगा रैली के माध्यम से आजादी के अमर नायकों के त्याग और बलिदान को याद किया। तिरंगे को सलामी देते बच्चों का उत्साह और ‘भारत माता की जय’ के जयघोष ने स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को भावनात्मक और राष्ट्रप्रेरक स्वर दिया। इन आयोजनों ने यह संकल्प भी मजबूत किया कि शिक्षा से सशक्त नई पीढ़ी ही विकसित, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव तैयार करेगी।  राज्य स्तर पर भी शान से लहराया राष्ट्रध्वज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय/शिक्षा निदेशक (बेसिक) कैंप कार्यालय में महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी एवं शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह का संदेश पढ़कर सुनाया गया। संदेश में शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का सशक्त माध्यम बनाते हुए बच्चों के उज्ज्वल, सक्षम और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण के संकल्प को रेखांकित किया गया।  शैक्षिक संस्थानों में अमर शहीदों को नमन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में निदेशक गणेश कुमार तथा राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान में निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को नमन किया। संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान, प्रशासनिक अधिकारी लव कुमार की उपस्थिति में इस अवसर पर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्वतंत्रता दिवस के महत्व को स्मरण किया गया। राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।  देशभक्ति के रंग में रंगे विद्यालय प्रदेशभर के विद्यालयों में देशभक्ति गीत, नृत्य, कविताओं और नाटकों की प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवगाथा को जीवंत किया। विभिन्न विद्यालयों में तिरंगा रैलियां निकाली गईं। वाद-विवाद और खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, राष्ट्रीय मूल्यों और देश के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ा गया। विद्यालय प्रांगणों में बच्चों की प्रस्तुतियों और सामूहिक गतिविधियों ने स्वतंत्रता दिवस को महज एक औपचारिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सीख, सहभागिता और राष्ट्रप्रेम के उत्सव में बदल दिया।  बेटियों ने दिया राष्ट्रनिर्माण का संदेश प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं ने विशेष उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया। गीत, कविता और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य और बलिदान को याद किया। छात्राओं की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि बेटियां शिक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रनिर्माण की अग्रिम पंक्ति में अपनी भूमिका निभा रही हैं।  विद्यालय बने जनभागीदारी के केंद्र स्वतंत्रता दिवस समारोह में बच्चों के साथ अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इससे विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम सामुदायिक उत्सव का रूप लेते दिखाई दिए। गांव से शहर तक विद्यालय परिसरों में तिरंगे के नीचे एकता, भाईचारे, प्रेम और देशभक्ति का संदेश गूंजता रहा।

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