स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन एक-दूसरे के हैं पूरक : जिलाधिकारी

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स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन एक-दूसरे के हैं पूरक : जिलाधिकारी


उरई, 02 जून (हि.स.)। विश्व पर्यावरण दिवस-2026 काे लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार से वर्चुअल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनपद के समस्त खण्ड विकास अधिकारियों, सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत), निवर्तमान प्रधानों, प्रशासकों, ग्राम पंचायत सचिवों तथा जनपद एवं विकासखण्ड स्तरीय अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी राजेश पाण्डेय ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी अनुपालन पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं सतत विकास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत स्तर पर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, स्रोत पर कूड़ा पृथक्करण, प्लास्टिक अपशिष्ट नियंत्रण एवं स्वच्छता गतिविधियों को जन आंदोलन का स्वरूप देने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं तथा पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए जनभागीदारी सबसे प्रभावी माध्यम है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम, जल संरक्षण गतिविधियाँ, प्लास्टिक मुक्त ग्राम अभियान तथा सामुदायिक सहभागिता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। पर्यावरण संरक्षण को जनजागरूकता से जोड़ते हुए प्रत्येक ग्राम पंचायत में लोगों को स्वच्छता एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनपद में ''स्वच्छ गांव-सुरक्षित जलवायु'' अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से सफल बनाते हुए स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और हरित विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया जाएगा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी ने एक अभिनव पहल करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद में 100 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु वाले प्राचीन एवं विरासत स्वरूप वृक्षों का विशेष सर्वेक्षण कर उनका चिन्हांकन किया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विशाल कुमार वर्मा

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