तीन दशकों से अनकहे सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश है ‘चूजिंग गोल्ड’ : डॉ. सौरभ गाडगिल

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तीन दशकों से अनकहे सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश है ‘चूजिंग गोल्ड’ : डॉ. सौरभ गाडगिल


तीन दशकों से अनकहे सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश है ‘चूजिंग गोल्ड’ : डॉ. सौरभ गाडगिल


कानपुर, 09 अगस्त (हि.स.)। अपने जीवन के अधिकांश समय में मैं इस यात्रा को जीने में इतना व्यस्त रहा कि कभी रुककर इसे समझने और परखने का अवसर नहीं मिला। ‘चूजिंग गोल्ड’ लिखते समय मैंने करीब तीन दशकों से अनकहे रह गए सवालों, अपने फैसलों, असफलताओं और उन छोटे-छोटे पलों को समझने की कोशिश की, जिन्होंने मेरे व्यक्तित्व और नेतृत्व को आकार दिया। यह बातें रविवार को पीएनजी ज्वेलर्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सौरभ गाडगिल ने कहीं।

पीएनजी ज्वेलर्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सौरभ गाडगिल की पहली पुस्तक ‘चूजिंग गोल्ड’ का विमोचन किया गया। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक सिर्फ एक कारोबारी सफर का दस्तावेज नहीं, बल्कि परिवार की विरासत, व्यक्तिगत संघर्ष, फैसलों और उनसे मिली सीख की कहानी है।

पीएनजी ज्वेलर्स की 194 वर्ष पुरानी कारोबारी विरासत के बीच डॉ. गाडगिल ने कम उम्र में जिम्मेदारी संभाली। पुस्तक में उन्होंने उस दौर से लेकर वर्तमान तक के सफर को बेहद व्यक्तिगत अंदाज में सामने रखा है। इसमें दादा और मां के साथ हुई बातचीत, जीवन में मिले महत्वपूर्ण सुझाव, कठिन परिस्थितियों में लिए गए फैसले और असफलताओं से मिली सीख को शामिल किया गया है।

डॉ. गाडगिल ने कहा कि कई बार जीवन के बड़े फैसलों से ज्यादा वे छोटे-छोटे क्षण व्यक्ति को गढ़ते हैं, जिनका महत्व उस समय समझ में नहीं आता। कोई बातचीत, कोई असफलता या वर्षों पहले मिली कोई सलाह बाद में जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक लिखते हुए उन्होंने खुद से यह सवाल भी किए कि किन फैसलों पर उन्हें गर्व है और कौन से निर्णय आज भी उन्हें सोचने पर मजबूर करते हैं।

उन्होंने बताया कि ‘चूजिंग गोल्ड’ किसी सफलता का निश्चित सूत्र नहीं देती। इसका उद्देश्य उन अनुभवों को साझा करना है, जो महत्वाकांक्षा, अनिश्चितता और जिम्मेदारियों के बीच आगे बढ़ने वाले व्यक्ति के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

पेंगुइन एंटरप्राइज़, कस्टम पब्लिशिंग, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के लीड अनुज दत्ता ने कहा कि इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ईमानदारी है। इसमें केवल उपलब्धियों का उल्लेख नहीं, बल्कि कठिन फैसलों, असफलताओं और संदेह के दौर को भी जगह दी गई है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक कारोबार से आगे बढ़कर नेतृत्व, दृढ़ता और व्यक्तिगत विकास की कहानी बन जाती है।

पुस्तक में विरासत को संभालने के साथ अपनी पहचान बनाने और बदलते समय के बीच सही फैसले लेने की डॉ. गाडगिल की यात्रा को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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