ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए लखनऊ में जुटे देशभर के कारोबारी, भारत को आर्थिक ताकत बनाने का रोडमैप तैयार
लखनऊ। कभी केवल खेती तक सीमित माने जाने वाले ग्रामीण क्षेत्र अब देश की नई आर्थिक ताकत बनकर उभर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ग्रामीण सड़कों, डिजिटल कनेक्टिविटी, स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादों और छोटे उद्यमों को मिले प्रोत्साहन का असर अब निजी क्षेत्र के निवेश और कारोबारी विस्तार में भी दिखाई देने लगा है। इसी बदलते ग्रामीण परिदृश्य की झलक शनिवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित समूह और रोजाना की डिस्ट्रीब्यूटर लीडरशिप समिट-2026 में देखने को मिली, जहां देशभर से आए डिस्ट्रीब्यूटर पार्टनर्स ने ग्रामीण बाजारों में बढ़ते अवसरों पर चर्चा की।
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, इंटरनेट और बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से उपभोक्ता बाजार का तेजी से विस्तार हुआ है। यही कारण है कि अब बड़ी कंपनियां और स्टार्टअप ग्रामीण भारत को अपने विकास का सबसे बड़ा केंद्र मान रहे हैं। समूह और रोजाना जैसे ब्रांड भी अपने विस्तार की रणनीति में गांवों और कस्बों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
समिट में कंपनी के संस्थापक अद्वैत विक्रम सिंह ने अगले पांच वर्षों की विकास योजना साझा करते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत वितरण नेटवर्क तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नए उत्पादों, नई श्रेणियों और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में कंपनी काम कर रही है।
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है। एक जिला एक उत्पाद (ODOP), स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण, ग्रामीण सड़क संपर्क, डिजिटल भुगतान और स्वरोजगार योजनाओं ने गांवों में उद्यमिता का नया माहौल तैयार किया है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता मांग और कारोबार दोनों तेजी से बढ़े हैं। ऐसे माहौल में निजी कंपनियों का गांवों की ओर बढ़ता रुझान प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

