विज्ञान के प्रसार में हिंदी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : प्रतिभा शुक्ला
राष्ट्रीय हिन्दी विज्ञान सम्मेलन के दूसरे दिन विज्ञान व अध्यात्म पर मंथन
झांसी, 21 मार्च (हि.स.)। महिला कल्याण और बाल विकास राज्यमंत्री मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि विज्ञान के विस्तार में हिंदी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंदी के माध्यम से विज्ञान को जन जन तक पहुंचाया जा सकता है। इससे देश का विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। उक्त विचार उन्होंने शनिवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में आयोजित राष्ट्रीय हिन्दी विज्ञान सम्मेलन के दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किया।
उन्होंने उम्मीद जताई की कि यह राष्ट्रीय हिन्दी विज्ञान सम्मेलन समाज को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश की सरकार भारत को सभी दृष्टियों से विकसित बनाने के लिए सतत प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हर मनुष्य में ब्रह्म है। ब्रह्म को जानना आसान नहीं। धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन ही हमें ईश्वर का बोध कराता है।
राज्यमंत्री ने कहा कि हमारा ज्ञान और विज्ञान हमें परम सत्ता यानी ईश्वर का बोध कराता है। परम ब्रह्म यानी ज्ञान को प्राप्त करने के लिए हमें निरंतर क्रियाशील रहना होगा। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं और बेटियां सशक्त बनें इसके लिए हमें सतत प्रयासरत रहना होगा। हिंदी आगे बढ़े। सनातन धर्म अजेय बना रहे यही प्रयास हमें करते लगातार करते रहना है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मुकेश पाण्डेय ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने इस सम्मेलन की समूची गतिविधियों और उनके महत्व को रेखांकित किया। कहा कि युवाओं में आध्यात्मिक और वैज्ञानिक चेतना का विकास ही इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है। विज्ञान और अध्यात्म दोनों के महत्व को हमें युवाओं को समझाना है।
महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय, ब्रह्म स्थान करौंदी,कटनी, मध्य प्रदेश के कुलपति डा पीके वर्मा ने कहा कि ज्ञान, विज्ञान से बहुत बड़ा है। उन्होंने भौतिकी और क्वांटम फिजिक्स दोनों के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान ने बहुत से सपनों को साकार किया है। हमें आध्यात्म को विज्ञान की दृष्टि से देखने की जरूरत है।
पूर्व आईएएसएस और मध्य प्रदेश के पूर्व वन संरक्षक डा पीसी दुबे ने अध्यात्म और क्वांटम भौतिकी विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने भागवत के चार श्लोकों का उल्लेख करते हुए भगवान के अस्तित्व को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पूरे जगत में जो कुछ हो रहा है उसे विज्ञान बता सकता है लेकिन जो प्रकृति से परे है उसको केवल आध्यात्म ही बता सकता है। उन्होंने सगुण और निर्गुण ब्रह्म के भेद को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ईमानदार वैज्ञानिकों ने भारतीय आध्यात्मिक जगत के विचारों से प्रेरणा लेने की बात स्वीकार की है। डा. दुबे ने कहा कि युवाओं और बच्चों को अध्यात्म और विज्ञान दोनों के बारे में समुचित जानकारी दी जानी चाहिए। कण यानी पार्टिकल और तरंग यानी वेब के बीच की स्थिति है सुपर पोजीशन। जब कोई चीज़ अत्यंत सूक्ष्म होती है तो वह तरंग रूप में दिखती है।
उन्होंने रक्तबीज वध के प्रसंग का उल्लेख करते हुए विज्ञान और अध्यात्म के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने तमाम वैज्ञानिकों और उनके आध्यात्मिक गुरुओं के निकट संबंध का भी विवरण पेश किया। उन्होंने कहा कि हम अपनी धार्मिक पुस्तकों के माध्यम से ईश्वर को जान सकते हैं।
कार्यक्रम में स्वामी प्रबुद्धानंद ने समस्त जन कल्याण के भाव वाले मंत्र से अपनी बात का सिलसिला शुरू किया। उन्होंने श्रीमद् भगवद्गीता में यज्ञ का यथार्थ अर्थ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वैदिक सनातन का ग्रंथ उपनिषद है। उन्होंने कहा कि एक समय हमारे पास मन की शक्ति से चलने वाला विमान था। विज्ञान के तमाम सूत्र हमारे शंकराचार्यों के भाष्य में उल्लिखित है लेकिन हम उसे नहीं पढ़ रहे हैं। जब हम अपने कर्म को सुधारने योग्य बन जाएंगे उसी दिन धार्मिक या आध्यात्मिक हो जाएंगे। जब कोई काम समष्टि के कल्याण के लिए किया जाता है तो उसे यज्ञ कहते हैं। नदी और पहाड़ सभी लोगों के लिए यज्ञ कर रहे, इस तथ्य को समझना होगा। मैं क्या करूं या न करूं यह विचार शास्त्र के आधार पर करना चाहिए। हम हिंदू शास्त्र से दूर होते गए यह सबसे बड़ी विडंबना है। उन्होंने सभी से गीता का नियमित अध्ययन करने का आह्वान किया।
मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग के पूर्व सदस्य
डा एसपी गौतम ने श्री रामायण में विज्ञान विषय पर अपना शोध-पत्र पेश किया। उन्होंने कहा कि मानस को विज्ञान के आधार पर देखें तो विशिष्ट अनुभूतियां हासिल होती हैं। उन्होंने कहा कि मानस में विज्ञान का उल्लेख बहुत गहराई से किया गया है। अध्यात्म और विज्ञान साथ साथ चलता है। उन्होंने सभी से श्रीराम चरित मानस का नियमित रूप से अध्ययन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन अंजली सक्सेना ने किया। सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। सम्मेलन में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डा शिव कुमार, पूर्व सांसद अनिल शुक्ल, पद्म श्री प्रो एच सी वर्मा, प्रो राजाराम यादव, प्रो संजय तिवारी, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री प्रवीण रामदास, डा अनु सिंगला, डा अनुपम व्यास, डा प्रियंका पाठक, डा शुभांगी निगम, डा सुमिरन श्रीवास्तव, रवि कुमार, इंजी एपीएस गौर, जन संचार एवं पत्रकारिता संस्थान के डा कौशल त्रिपाठी, उमेश शुक्ल, डा राघवेंद्र दीक्षित, अतीत विजय,शाश्वत सिंह समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

