मन, वचन और आचरण की एकता से ही देश का सर्वांगीण कल्याण सम्भव : विमल दुबे

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मन, वचन और आचरण की एकता से ही देश का सर्वांगीण कल्याण सम्भव : विमल दुबे


मन, वचन और आचरण की एकता से ही देश का सर्वांगीण कल्याण सम्भव : विमल दुबे


मन, वचन और आचरण की एकता से ही देश का सर्वांगीण कल्याण सम्भव : विमल दुबे


बुवि में तीन दिवसीय राष्ट्रीय हिन्दी विज्ञान सम्मेलन का हुआ समापन

झांसी, 22 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश केझांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय हिन्दी विज्ञान सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि मंडलायुक्त विमल दुबे ने वैश्विक मंच पर भारतीय पहचान को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को 'विश्व गुरु' के रूप में पुनः स्थापित करने के लिए हमें मौलिक चिंतन और वैज्ञानिकता को अपनाना होगा। श्री दुबे ने स्पष्ट किया कि केवल शोध पत्र लिखना पर्याप्त नहीं है; असली चुनौती यह है कि हमारा शोध समाज के लिए कितना लाभकारी है।

एआई (AI) के युग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अब भाषा कोई बाधा नहीं है, बल्कि हमारी असली शक्ति भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित है। उन्होंने 'विज्ञान भैरव तंत्र' का उदाहरण देते हुए ऋषियों की 'तीसरी दृष्टि' को नवाचार का आधार बताया। उनके अनुसार, मन, वचन और आचरण की एकता ही देश का सर्वांगीण कल्याण कर सकती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. संजय तिवारी (कुलपति, दुर्ग विश्वविद्यालय) ने चिंता व्यक्त की कि हम प्रति दस लाख की आबादी पर केवल 250 वैज्ञानिक तैयार कर रहे हैं। उन्होंने नवाचार में अंग्रेजी के प्रभुत्व को एक बाधा बताया और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य हेतु मातृभाषा में वैज्ञानिक कौशल बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं, विज्ञान भारती के देवेंद्र ने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य विज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना और अंग्रेजी के एकाधिकार को समाप्त करना है। यूके से आईं डॉ. दिव्या माथुर ने हिंदी साहित्य और विज्ञान के समन्वय पर विचार रखे।

सम्मेलन में 500 से अधिक शोध-पत्र पढ़े गए, जिनमें 50% से अधिक भागीदारी नारी शक्ति की रही। विभिन्न सत्रों में प्रियंका, काजल सिंह, कपिल अहिरवार और पलक जैसे शोधार्थियों को उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया गया।

अंत में, डॉ. अनु सिंगला ने आभार व्यक्त किया। यह सम्मेलन इस संकल्प के साथ समाप्त हुआ कि अगला राष्ट्रीय आयोजन दिल्ली में होगा, जो भारतीय भाषाओं में विज्ञान के प्रसार को नई गति देगा।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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