फर्रुखाबाद: नाविक न होने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हाथों में पतवार थाम नाव चला रही महिलाएं

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फर्रुखाबाद: नाविक न होने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हाथों में पतवार थाम नाव चला रही महिलाएं


फर्रुखाबाद, 06 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में रामगंगा और गंगा नदी में बढ़े जलस्तर से अमृतपुर तहसील क्षेत्र के गांवों में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मंझा की मड़ैया में प्रशासन की ओर से नाव चलाने के लिए चालक (नाविक) की व्यवस्था नहीं होने का आरोप है। मजबूरी में महिलाएं और लड़कियां खुद नाव की पतवार थामकर बाढ़ के पानी के बीच जरूरी काम के लिए नाव से आने-जाने को मजबूर हैं।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि बाढ़ के कारण आवागमन प्रभावित है। नाव ही आने-जाने का सहारा है, लेकिन नाव चलाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई नाविक उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूरी में महिलाएं स्वयं नाव चलाकर अपनी और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए बाहर निकल रही हैं। बाढ़ के पानी में इस तरह नाव चलाना जोखिम भरा है, बावजूद इसके ग्रामीणों के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

उधर, गुलरिया बाली भावन गांव में रविवार को बाढ़ का पानी करीब सात-आठ घरों में पहुंच गया है। ग्रामीण शिवओम ने बताया कि गांव में खांसी, बुखार समेत अन्य बीमारियों से लोग परेशान हैं। स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीणों को बाढ़ के पानी से होकर निजी चिकित्सकों के पास इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।

करीब चार वर्ष से निर्माणाधीन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी बाढ़ के पानी की चपेट में है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र अब तक पूरा नहीं हुआ है। बाढ़ के समय स्वास्थ्य सुविधा की जरूरत बढ़ने के बावजूद अधूरा केंद्र ग्रामीणों के लिए बेकार साबित हो रहा है।

बाढ़ प्रभावित महिला शिवश्री का कहना है कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जिस जमीन पर बनाया गया है, वह उनकी निजी जमीन थी और जमीन के बदले उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है।

अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया हर गांव में नाव पर नाविक लगाए गए हैं। लेकिन नावों को अगर ग्रामीणों का चलना पड़ रहा है तो इस मामले की जांच कराई जाएगी

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हिन्दुस्थान समाचार / चंद्रपाल सिंह सेंगर

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