भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि के कार्यक्रमों का शुभारंभ, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव ने वर्चुअली किया संबोधित

WhatsApp Channel Join Now
भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि के कार्यक्रमों का शुभारंभ, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव ने वर्चुअली किया संबोधित


भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि के कार्यक्रमों का शुभारंभ, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव ने वर्चुअली किया संबोधित


भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि के कार्यक्रमों का शुभारंभ, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव ने वर्चुअली किया संबोधित


-नानाजी की 16वीं पुण्यतिथि पर चित्रकूट के दीनदयाल परिसर में 5 स्थानों पर शुरू हुए सेमिनार, कार्यशाला एवं सम्मेलन

कई विश्वविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं से ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ पहुंचे चित्रकूट

चित्रकूट, 25 फ़रवरी (हि.स.)। भारत रत्न नानाजी देशमुख के निर्वाण के 16 वर्ष पूर्ण होने पर उनकी 16 वीं पुण्यतिथि पर 25, 26 एवं 27 फरवरी को दीनदयाल परिसर में पांच अलग-अलग सम्मेलन व संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। इन कार्यक्रमाें का सामूहिक उद्घाटन सत्र बुधवार को विवेकानन्द सभागार में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के वर्चुअल उद्बोधन से हुआ।

इस अवसर पर सतना सांसद गणेश सिंह, नीमच मानसा के विधायक माधव मारु, बड़ा मठ के महंत वरुण प्रपन्नाचार्य महाराज, गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डॉ रामनारायण त्रिपाठी, सुदामा कुटी के महंत राम लखन दास महाराज, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो आलोक चौबे, जगतगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडे, जिला पंचायत चित्रकूट के अध्यक्ष अशोक जाटव, जिला पंचायत सतना के अध्यक्ष रामखेलावन कोल, बांदा चित्रकूट कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, तुलसी शोध संस्थान की निदेशक श्रीमती मंजूषा चौधरी, नगर पंचायत चित्रकूट की अध्यक्ष साधना पटेल, कलेक्टर सतना सतीश कुमार एस, एसपी सतना एवं दीनदयाल शोध संस्थान के कोषाध्यक्ष वसंत पंडित आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

आभाषी माध्यम पर भोपाल से संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रोत्थान के लिए अपने जीवन को समर्पित करने वाले श्रद्धेय नाना जी को उनकी 16वीं पुण्यतिथि पर अपने श्रद्धा पुष्प अर्पित करता हूं। नाना जी ने विविध क्षेत्रों में हजारों लोगों को गढ़ने का काम किया है, उन्होंने प्रत्येक क्षेत्र में बहुत ही उन्नतशील काम खड़ा किया है। नानाजी ने चित्रकूट के उत्थान में कई कार्य किए। उन्होंने कृषि, शिक्षा, अनुसंधान, रोजगार, स्वास्थ और स्वावलम्बी बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र मे बहुत बड़ा कार्य किया है। उनके सभी कार्यों को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से नमन करता हूं और इस महत्वपूर्ण समाजोपयोगी आयोजन के लिए आयोजक मंडल को शुभकामना देता हूं।

उद्घाटन सत्र का संचालन करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के सीईओ अमिताभ वशिष्ठ ने तीन दिन तक चलने वाले कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। कृषि विज्ञान केंद्र चित्रकूट के प्रमुख डॉ राजेंद्र सिंह नेगी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो आलोक चौबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि बड़े शहरों में शिक्षा तो मिल सकती है लेकिन आध्यात्म और संस्कार का अभाव है। लेकिन राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख के आगमन के बाद चित्रकूट वह स्थान बन गया है जहां आध्यात्म, संस्कार और शिक्षा तीनों मिलते हैं।

जिला पंचायत चित्रकूट के अध्यक्ष अशोक जाटव ने कहा कि मुझे नाना जी के सानिध्य में काम करने का अवसर तो नहीं मिला लेकिन उनके किए कार्य आज परिणाम स्वरुप हमारे सामने हैं। संस्थान के समाज मूलक कार्यों को मैंने नजदीकी से देखा भी है और नाना जी के प्रत्येक कार्य आज समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

नीमच विधायक माधव मारू ने कहा कि नाना जी ने दस्यु प्रभावित क्षेत्र में अपना काम खड़ा करके लोगों में जिस तरह हृदय परिवर्तन करके एक बहुत बड़ा सामाजिक पुनरर्चना की प्रयोगशाला तैयार की है वो देश दुनिया के लिए अनुकरणीय है। महंत वरुण प्रपन्नाचार्य ने कहा कि नानाजी जब चित्रकूट आए तो उन्होंने सबसे पहले यहां शिक्षा और कृषि पर फोकस किया उसी के चलते आज चित्रकूट में विकास के मार्ग प्रशस्त हुए हैं। महंत राम लखन दास महाराज ने कहा कि शिक्षा, संस्कार और साधना से व्यक्ति का जीवन परिपूर्ण होता है। चित्रकूट आज वह स्थान बन गया है जहां व्यक्ति का सर्वांगीण विकास हो रहा है।

गायत्री शक्तिपीठ के डॉ रामनारायण त्रिपाठी ने कहा कि चित्रकूट मां सती का तीर्थ था, फिर भगवान राम जी आए तो राम जी का तीर्थ बन गया और जब नाना जी आए तो राष्ट्र तीर्थ और राज तीर्थ भी बन गया। तुलसी शोध संस्थान की निदेशक मंजूषा चौधरी ने कहा कि मैंने नाना जी को तो नहीं देखा लेकिन एक गुरु ने जिस तरह से अपने शिष्य को गढ़ा होगा उस रूप में मैंने अभय महाजन जी और उनके कार्यों को देखा है। जिन किसानों ने अपने अन्न से हमें बड़ा किया है आज वह यहां अग्रिम पंक्ति में बैठे हैं यही सही अर्थ में ग्रामोदय है। उद्घाटन सत्र के अंत में दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रतन पटेल

Share this story