भरत जी का त्याग और भ्रातृप्रेम समाज के लिए अनुकरणीय : आचार्य शांतनु महाराज
जौनपुर, 29 अक्टूबर (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में नगर के बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामकथा के अष्टम दिवस पर कथाव्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने भरत चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भरत जी का त्याग, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और भ्रातृप्रेम समाज के लिए अनुकरणीय है। उनके चरित्र से निःस्वार्थ प्रेम और पारिवारिक मर्यादा की प्रेरणा मिलती है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मुख्य आयोजक ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित कथा में आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम और भरत जी के पवित्र संबंधों का वर्णन करते हुए कहा कि भरत जी ने राजसत्ता और सिंहासन के मोह से ऊपर उठकर त्याग और समर्पण का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने बड़े भाई श्रीराम के प्रति सम्मान और प्रेम को सर्वोपरि रखा
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आचार्य ने कहा कि भरत जी ने भगवान श्रीराम को अयोध्या वापस लाने का प्रयास किया। उनके वनवास के दौरान स्वयं राजसी सुखों से दूर रहकर श्रीराम के प्रतिनिधि के रूप में राज्य का दायित्व निभाया। उनका जीवन सिखाता है कि सच्चा प्रेम स्वार्थ से परे होता है और कर्तव्य का निर्वहन करते समय व्यक्तिगत सुखों के बजाय आदर्शों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से भरत जी के आदर्शों को जीवन में अपनाने, परिवार में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने तथा समाज में सेवा, त्याग और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। कथा के दौरान भरत जी के चरित्र का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
इस अवसर पर सांसद जगदंबिका पाल, रीता बहुगुणा जोशी, राज्यसभा सांसद साधना सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्रनाथ पांडेय, पूर्व सांसद धनंजय सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया, जिलाध्यक्ष अजीत प्रजापति, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, अपर मुख्य सचिव अमित घोष, प्रवीन सिंह, कुमार ऋषिकेश, हरीश प्रताप सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

