जीवन जीने की शैली और नैतिक आधार है भागवत पुराण : श्रीजीयर स्वामी

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जीवन जीने की शैली और नैतिक आधार है भागवत पुराण : श्रीजीयर स्वामी


- अयोध्या में हनुमानजी और प्रभु श्रीराम का दर्शन कर आनंदित हो रहे भक्त

- स्वामीजी ने बताया शास्त्रों का महत्व, 26 मार्च तक चलेगा श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ

अयोध्या, 23 मार्च (हि.स.)। श्रीजीयर स्वामी महाराज ने राजघाट अयोध्या में चल रहे श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के पांचवें दिन सोमवार को प्रवचन में जीवन और धर्म की सीख दी। उन्होंने कहा कि कथा सुनने का अर्थ है अपने अंदर की बुराइयों को छोड़ देना। भागवत पुराण केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की शैली और नैतिक आधार है।

स्वामीजी महाराज ने शास्त्रों का महत्व बताते हुए कहा कि आहार, निद्रा, भय और मैथुन मनुष्य और पशु में समान हैं, लेकिन धर्म-ज्ञान ही मनुष्य और पशु में अंतर पैदा करता है। उन्होंने घर में पूजा के लिए शंख बजाने के नियम, मिट्टी के पात्रों के उपयोग, जूठा भोजन न करना और पति-पत्नी के आचार-व्यवहार की शुद्धता पर भी जोर दिया।

विश्व कल्याण के लिए 5000 यजमानों ने दी आहुति

विश्व कल्याण के उद्देश्य से पांचवें दिन लगभग 5000 यजमानों ने वैदिक मंत्रों के साथ सामूहिक आहुति दी। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत दूर-दूर से श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं और यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर हनुमानगढ़ी में हनुमानजी व प्रभु श्रीराम का दर्शन कर रहे हैं।

भक्तिमय वातावरण और उपनयन संस्कार

भोजनालय में प्रतिदिन हजारों लोग प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से रात्रि 12 बजे तक चलता है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय बन गया है। सुबह 7:30 बजे आरती, दिनभर कथावाचक अमृतपान और शाम 7 बजे स्वामीजी महाराज का प्रवचन चलता है। यह महायज्ञ 26 मार्च तक जारी रहेगा। सोमवार को सैकड़ों बच्चों का उपनयन संस्कार भी संपन्न हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश

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