ऑनलाइन एडमिशन के नाम पर साइबर ठगी से रहें सावधान: डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर

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ऑनलाइन एडमिशन के नाम पर साइबर ठगी से रहें सावधान: डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर


फर्जी वेबसाइटों और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए छात्रों को बनाते हैं निशाना

जौनपुर,24 मई (हि.स.)। आगामी नए शैक्षणिक सत्र के लिए देश भर में एडमिशन के नाम पर साइबर अपराधी तेजी से सक्रिय हो गए है। इंटरनेट, फेसबुक, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन और लुभावने ऑफर देकर छात्रों और अभिभावकों को जाल में फंसाते हैं। प्रोसेसिंग फीस, सीट कन्फर्मेशन और विदेश में एडमिशन के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बाद ठग गायब हो जाते हैं।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के साइबर क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने इस मामले में रविवार को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर विज्ञापन और वेबसाइट पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। कई साइबर ठग फर्जी वेबसाइट बनाकर उन्हें बिल्कुल असली संस्थानों जैसा रूप दे देते हैं। इनमें नामचीन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की तस्वीरें लगाकर लोगों को भ्रमित किया जाता है।

डॉ. राठौर ने सचेत करते हुए कहा कि आजकल सीमित सीट, 100 प्रतिशत प्लेसमेंट, घर बैठे एडमिशन और विदेश में पढ़ाई का सुनहरा मौका जैसे आकर्षक संदेशों के जरिए छात्रों पर जल्दी फैसला लेने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाता है। कई बार छात्र बिना सत्यापन किए ही जल्दबाजी में फीस जमा कर देते हैं और बाद में ठगी का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने अपील की है कि कभी भी टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप पर या एडमिशन के लिए आने वाले संदेशों के लिंक को क्लिक करके अपरिचित लोगों को पैसा ट्रांसफर न करें।

उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता की जांच जरूर करें। इसके लिए संबंधित विश्वविद्यालय, यूजीसी, आईसीटीई, पीसीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी देखना जरूरी है। इसके साथ ही केवल ऑनलाइन जानकारी के भरोसे पैसा ट्रांसफर न करें। संस्थान का ऑफलाइन सत्यापन जरूर करें और संभव हो तो वहां जाकर स्वयं जानकारी लें। दाखिले से पहले वहां पढ़ रहे छात्रों या पूर्व छात्रों से फीडबैक लेना बेहद मददगार होता है।

विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी ने बताया कि विदेश में पढ़ाई कराने के नाम पर भी फर्जी एजेंसियां सक्रिय हैं। ये खुद को अधिकृत एजेंट या काउंसलर बताकर एडवांस फीस लेती हैं, लेकिन वास्तविक प्रक्रिया के समय पूरा मामला फर्जी निकलता है।

इसके अलावा, ऑनलाइन कोर्स के नाम पर भी बड़े स्तर पर धोखाधड़ी हो रही है। विज्ञान, फार्मेसी और फिजियोथैरेपी जैसे व्यावहारिक पाठ्यक्रमों को पूरी तरह ऑनलाइन बताकर एडमिशन करा दिया जाता है, जबकि इनकी पढ़ाई बिना लैब और प्रैक्टिकल के ऑनलाइन संभव ही नहीं होती।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

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