बीबीएयू ने रचा नया कीर्तिमान, उपलब्ध हुआ हिन्दी साहित्य का ऑनलाइन पाठ्यक्रम
लखनऊ, 17 जून (हि.स.)। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ ने डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग एवं इलेक्ट्रानिक मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर (मीडिया सेंटर), लखनऊ के संयुक्त प्रयासों से विकसित स्वयं ऑनलाइन पाठ्यक्रम हिन्दी साहित्य का इतिहास (आधुनिक काल) अब भारत सरकार के प्रतिष्ठित स्वयं मंच पर शिक्षार्थियों के लिए उपलब्ध हो गया है। यह महत्वपूर्ण कार्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के दिशा-निर्देशन तथा मीडिया सेंटर के निदेशक प्रो. गोपाल सिंह एवं हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रामपाल गंगवार के मार्गदर्शन में पूर्ण किया गया है। अब देश-विदेश के विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक तथा हिन्दी साहित्य में रुचि रखने वाले शिक्षार्थी अब इस पाठ्यक्रम में ऑनलाइन नामांकन कर सकते हैं। पाठ्यक्रम में आधुनिक हिन्दी साहित्य के इतिहास, प्रमुख साहित्यकारों, साहित्यिक आंदोलनों, प्रवृत्तियों तथा विभिन्न साहित्यिक विधाओं का समग्र एवं व्यवस्थित अध्ययन सामग्री प्रस्तुत किया गया है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने पाठ्यक्रम निर्माण से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते योगदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वयं मंच पर विकसित किए गए ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक व्यापक पहुँच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे तथा ‘कहीं भी, कभी भी सीखने’ की अवधारणा को सशक्त बनाएँगे।
कुलपति ने मीडिया सेंटर की सराहना करते हुए कहा कि बीबीएयू निरंतर डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विकास, तकनीक-संचालित शिक्षा को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पाठ्यक्रम निर्माण में योगदान देने वाले सभी शिक्षकों, विषय विशेषज्ञों, तकनीकी विशेषज्ञों एवं मीडिया सेंटर की टीम के समर्पण और परिश्रम की प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों से अधिक से अधिक संख्या में स्वयं पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने तथा डिजिटल शिक्षण के इस सशक्त माध्यम से जुड़ने का आह्वान किया।
मीडिया सेंटर के निदेशक (प्रभारी) प्रो. गोपाल सिंह ने टीम के सभी सदस्यों को बधाई दी तथा उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम द्वारा विकसित स्वयं पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं डिजिटल शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
उल्लेखनीय है कि इस पाठ्यक्रम के प्रस्ताव को पूर्व में कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन, नई दिल्ली द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसके उपरांत ईएमएमआरसी (मीडिया सेंटर), लखनऊ द्वारा पाठ्यक्रम के निर्माण, वीडियो व्याख्यानों की रिकॉर्डिंग, संपादन, ई-कंटेंट विकास तथा तकनीकी समन्वय का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
अब देश-विदेश के विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक तथा हिन्दी साहित्य में रुचि रखने वाले अन्य शिक्षार्थी स्वयं पोर्टल पर जाकर इस पाठ्यक्रम में स्वयं को नामांकित कर सकते हैं। यह पाठ्यक्रम आधुनिक हिन्दी साहित्य के विकास, प्रमुख साहित्यकारों, साहित्यिक आंदोलनों तथा विभिन्न साहित्यिक विधाओं का व्यापक सामग्री प्रदान करेगा।
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को डिजिटल माध्यम से अधिकाधिक विद्यार्थियों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पाठ्यक्रम में विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा तैयार वीडियो व्याख्यान, अध्ययन सामग्री, क्विज़ एवं मूल्यांकन की सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे शिक्षार्थियों को लचीले एवं प्रभावी तरीके से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय

