रामगोविंद चौधरी ने जेपी के वरदहस्त से राजनीति में बनाया था मुकाम, उन्हीें की कृपा से टिकट भी मिला
बलिया, 26 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कद्दावर सपा नेता व पूर्व मंत्री राम गाेविंद चाैधरी के निधन के बाद अब उनके नेत्तृत्व और राजनीति के उतार चढ़ाव की चर्चा हाे रही है। चाैक चाैराहाें पर आम चर्चा है कि उन्हाेंने आपातकाल आंदाेलन में नायक की तरह काम किया। सब जानते हैं कि जयप्रकाश नारायण द्वारा छात्रों का आह्वान और उसके डर से लगाए गए आपातकाल में बलिया सर्वाधिक प्रभावित हुआ। इसी बलिया का एक छात्रनेता बाद में चलकर उत्तर प्रदेश विधानसभा का नेता प्रतिपक्ष बना। अब वह नेता यानी रामगोविंद चौधरी इस दुनिया को अलविदा कह गए हैं।
बलिया जेपी का गृह जनपद होने के नाते यहां के लोग, खासकर छात्र-युवा बहुत अधिक प्रभावित हुए। जेपी के छात्र आंदोलन से पत्रकार, वैज्ञानिक और समाज के हर तबके के लोग जुड़े। गुजरात से शुरू हुए जेपी के आंदोलन और फिर देश पर थोपे गए 'आपातकाल' की कोख से ही निकले थे खांटी समाजवादी नेता रामगोविन्द चौधरी। जयप्रकाश नारायण के आह्वान के बाद बलिया में सबसे मजबूत आंदोलन चला। आपातकाल को याद करते हुए रामगोविंद चौधरी के साथ जेल में रहे पूर्व मंत्री राजधारी सिंह बताते हैं कि उस वक्त सड़क जाम करने के साथ ही रेल भी रोकी गयी। तब बड़े वामपंथी नेता और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बड़े पदाधिकारी भी बलिया आए थे। पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक गिरफ्तारी बलिया में हुई थी।
जेपी के आंदोलन के दौरान ऑल इंडिया संघर्ष समिति के द्वारा जब कालेजों में हड़ताल का आह्वान किया गया तब रामगोविंद चौधरी टीडी कालेज का छात्रसंघ अध्यक्ष बन चुके थे। जिला छात्र युवा संघर्ष समिति के अध्यक्ष गौरी भैया (पूर्व मंत्री) थे और रामगोविंद चौधरी सह संयोजक थे। ऑल इंडिया संघर्ष समिति आह्वान पर रामगोविंद ने अपने कॉलेज में घण्टी बजवा कर हड़ताल करायी थी। मौके पर ही गिरफ्तारी हुई थी।
गिरफ्तारी के बाद बलिया में करीब 50 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। राजधारी सिंह बताते हैं कि एक बार इसी आंदोलन के दौरान जयप्रकाश नारायण अपने गांव आए थे। रामगोविंद चौधरी उनसे मिलने गए तो पता चला कि उन्हें इनके आंदोलन की जानकारी हो गयी थी। जिससे वे बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपनी जेब से रसीद निकाल कर रामगोविंद को छात्र युवा संघर्ष समिति का सदस्य बनाया था।
पूर्व मंत्री राजधारी सिंह ने आगे बताया कि जेपी के आंदोलन से उपजे हालातों के बाद जब देश में इमरजेंसी लगी तो जेल भरो आंदोलन बलिया में शुरू किया गया। उस वक्त अलग-अलग समूहों में बड़ी संख्या छात्र कचहरी से जेल भेजे गए। राजधारी सिंह ने बताया कि रामगोविन्द चौधरी थोड़े दिन के लिए भूमिगत भी थे। आपातकाल लागू के अगले दिन पता चला कि जयप्रकाश नारायण जेल में बंद हो गए हैं। इसके बाद कुछ छात्रनेता रिक्शा से शहर में प्रचार करने लगे कि जेपी को बंद कर दिया गया है और इसके विरोध में बलिया बंद होगा। छात्रनेता रामगोविंद चौधरी काे भी पुलिस ने बैठा लिया। हालांकि कुछ ही देर में खैनी खाने के बहाने वे फरार हो गए। इसके बाद बलिया से गाजीपुर तक भूमिगत रह कर रामगोविंद के नेतृत्व में छात्रनेताओं द्वारा आंदोलन चलाया गया। ये लोग गली-गली पम्फ्लेट और पोस्टर चिपकाते रहे। यहां तक कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के बंगले पर भी प्रतिदिन पोस्टर चिपका देते थे। हालात ये हो गए कि उस समय रामगोविंद को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए पुलिस ने पांच सौ रुपये का इनाम तक घोषित किया था। इन तमाम कठिनाईयों के बाद भी आंदोलन कमजोर नहीं पड़ा। रामगोविंद को भी सात लोगों के साथ टीडी कालेज से गिरफ्तार किया गया। 19 महीने से अधिक समय तक जेल में व्यतीत किया।
आपातकाल हटने के बाद रामगोविंद चौधरी की रिहाई उस दिन हुई जब चंद्रशेखर के लोकसभा चुनाव का नामांकन था। बाद में 1977 के विधानसभा चुनाव में रामगोविंद चौधरी और गौरी भैया को चंद्रशेखर से कह कर विधानसभा चुनाव का टिकट भी जेपी ने ही दिलवाया था। जहां से रामगोविंद चौधरी ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।---------------
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / नीतू तिवारी

