बलिया में नाबालिग लड़की ने रुकवाया अपना बाल विवाह

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बलिया में नाबालिग लड़की ने रुकवाया अपना बाल विवाह


बलिया, 05 नवंबर (हि.स.)। बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता और सही समय पर उठाया गया एक कदम किसी बच्ची की जिंदगी बदल सकता है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 16 साल की एक लड़की ने इसकी मिसाल पेश की। शादी तय होने की जानकारी मिलते ही उसने खुद चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर फोन किया और बाल विवाह रोकने के लिए मदद मांगी। उसकी सूचना पर महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस की टीम और नवभारती नारी विकास समिति तत्काल सक्रिय हुई और समय रहते बाल विवाह रुकवा दिया गया।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बैरिया थाना क्षेत्र के एक गांव की नाबालिग लड़की की शादी सऊदी अरब में काम करने वाले एक 25 वर्षीय युवक से तय की गई थी। 11 नवंबर को उसके गांव में शादी होनी थी। इसी बीच बीते मंगलवार को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सोनिया (बदला नाम) का फोन आया। उसने बताया कि वह नाबालिग है और कुछ दिनों बाद उसकी शादी होने वाली है।

सूचना मिलते ही जिले का महिला एवं बाल विकास विभाग हरकत में आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. अमरेन्द्र कुमार पौत्सयायन ने तत्काल एक टीम गठित की, जिसमें नवभारती नारी विकास समिति के मंजीत यादव भी शामिल रहे। संयुक्त टीम ने रसड़ा कोतवाली पुलिस के सहयोग से गांव पहुंचकर मामले की जांच की और शादी रुकवा दी। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी संगठन नवभारती नारी विकास समिति की सक्रियता से रोके गए इस बाल विवाह की घटना की काफी चर्चा है।

उल्लेखनीय है कि जेआरसी नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। ये हर जिले में स्कूलों और पंचायत स्तर पर बाल विवाह सहित बच्चों के अधिकारों को लेकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है। उधर, जब बच्ची के पिता से कम उम्र (नाबालिग) में उसकी शादी करने की वजह पूछी गई तो उन्होंने अपनी मजबूरी बताई।

उन्होंने कहा कि वह विकलांग हैं और ज्यादा समय तक बेटी की जिम्मेदारी उठाने में सक्षम नहीं हैं। पिता के मुताबिक, बेटी की मां पास के एक कारखाने में मजदूरी करती है। जब लड़की के घरवालों को बताया कि यह अपराध है और उन्हें सजा हो सकती है तो वे शादी टालने के लिए तैयार हो गए। हालांकि, लड़के वाले शादी रोकने के लिए राजी नहीं थे। उनका कहना था कि शादी के कार्ड बंट चुके हैं और अब विवाह नहीं हुआ तो समाज में उनकी काफी बेइज्जती होगी। टीम ने लड़के के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी और इसके कानूनी परिणामों के बारे में समझाया। इसके बाद वे शादी रोकने के लिए तैयार हो गए।

दोनों परिवारों से शपथ पत्र लिया गया कि बच्ची का विवाह निर्धारित कानूनी उम्र से पहले नहीं किया जाएगा। लड़की हाईस्कूल तक पढ़ाई कर चुकी है और आगे भी पढ़ना चाहती है। समय रहते उसके द्वारा उठाए गए कदम ने न केवल उसे बाल विवाह से बचाया, बल्कि आगे पढ़ने और अपनी पसंद का भविष्य बनाने का रास्ता भी खुला रखा।

नवभारती नारी विकास समिति के निदेशक अजहर अली ने गुरुवार को कहा कि 'हम गांव-गांव में बाल विवाह के उन्मूलन को लेकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं, खासकर स्कूलों में। उसी वजह से यह बाल विवाह रुकवाने में मदद मिली।' उन्होंने कहा कि इस कार्य में पुलिस-प्रशासन का सहयोग मिला और उन्होंने त्वरित कार्रवाई की, जिसकी वजह से हम लड़का और लड़की दोनों के परिवारों से जल्द संपर्क कर सके। उन्होंने बताया कि लड़की ने अगर समय रहते फोन करके जानकारी नहीं दी होती तो उसकी मदद करना मुश्किल होता। यह मामला बताता है कि बाल विवाह के खिलाफ अभियान में बच्चों को उनके अधिकारों और मदद पाने के रास्तों की जानकारी देना बदलाव का वाहक बन सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नीतू तिवारी

Livevns.news Desk
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