संतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी : डॉ राघवेंद्र सिंह

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संतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी : डॉ राघवेंद्र सिंह


संतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी : डॉ राघवेंद्र सिंह


कानपुर, 24 अप्रैल (हि.स.)। संतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होगा और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी। रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैव उर्वरक और हरित खाद को अपनाना जरूरी है। एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन और ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं के माध्यम से क्षमता निर्माण किया जाएगा। यह बातें शुक्रवार को डॉ राघवेंद्र सिंह ने कहीं।

आईसीएआर अटारी जोन तीन कानपुर के निदेशक डॉ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान द्वारा उत्तर प्रदेश में संतुलित उर्वरक उपयोग पर संयुक्त समन्वय समिति की बैठक हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालय, अटारी, कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में प्रदेश में मृदा स्वास्थ्य सुधार और सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

डॉ राघवेंद्र सिंह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, इसलिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरकों, हरित खाद और ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा ताकि वे संतुलित उर्वरक उपयोग की दिशा में आगे बढ़ सकें।

उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने में मदद करेगी बल्कि कृषि उत्पादन को भी बढ़ाएगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूती मिलेगी। यह कार्यक्रम प्रदेश में कृषि क्षेत्र के सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में सहायक बनेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद

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