कर्मयोगिनी माता अहिल्या का राम जन्मभूमि परिसर में हुआ मंचन

WhatsApp Channel Join Now
कर्मयोगिनी माता अहिल्या का राम जन्मभूमि परिसर में हुआ मंचन


कर्मयोगिनी माता अहिल्या का राम जन्मभूमि परिसर में हुआ मंचन


कर्मयोगिनी माता अहिल्या का राम जन्मभूमि परिसर में हुआ मंचन


कर्मयोगिनी माता अहिल्या का राम जन्मभूमि परिसर में हुआ मंचन


अयोध्या, 17 जनवरी (हि.स.)। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तुत कर्मयोगिनी माता अहिल्या महानाट्य ने दर्शकों के सम्मुख माता अहिल्याबाई होल्कर के प्रेरणास्पद जीवन, त्याग, सेवा व सुशासन की जीवंत प्रस्तुति की| भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) व श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के संयुक्त तत्वाधान में अंगद टीला परिसर में आयोजित कर्मयोगिनी माता अहिल्या महानाट्य माता अहिल्या के प्रेरणास्पद जीवन, उनके त्याग, सेवा, सुशासन और लोककल्याणकारी प्रेरणास्पद जीवन, उनके त्याग, सेवा, सुशासन और लोककल्याणकारी दृष्टि पर दर्शकों को चिंतन करने पर विवश कर गया।

महानाट्य ने यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय दर्शन में कभी नारी शक्ति को कमतर आँका ही नहीं गया। नारी सशक्तिकरण शब्दावली पश्चिमी सभ्यता की देन है। हमारे यहाँ नारियों को सदैव पूज्य व शक्ति स्वरूपा का दर्जा प्राप्त रहा। महानाट्य में माता होल्कर के बाल्यकाल से लेकर सम्पूर्ण शासनकाल तक की उनकी जीवन-यात्रा, सामाजिक समरसता के प्रति प्रतिबद्धता, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्निर्माण में योगदान तथा नारी सशक्तिकरण के उनके आदर्शों को रंगमंचीय भाषा में सजीव ढंग से उकेरा गया। मंचन में प्रस्तुत किया गया कि बचपन से मस्तमौली और निर्भीक अहिल्या के पिता मनकोजी शिंदे व माँ सुशीला शिंदे ने उसकी शादी मालवा के राजा के पुत्र खांडे राव से कर दिया| ससुर ने बहू अहिल्या को राज्य की जिम्मेदारी देना शुरू कर दिया ताकि वह राज्य संचालन में पति की सहायता कर सके। अहिल्या के बुद्धि कौशल से राजा मल्हार राव राज्य सुरक्षा के प्रति निश्चिंत हो गए। कुछ समय बाद खांडे राव युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। ससुर मल्हार राव की प्रेरणा से अहिल्या ने राज्य सिंहासन लेना स्वीकार किया। उन्होंने एक कर्मयोगी के रूप में न्यायोचित राज्य कार्य प्रारम्भ कर दिया, प्रजा में जय जयकार होने लगा।

उन्होंने ने लाख समस्याओं के बावजूद अनेकों मंदिर, धर्मशालाएं, सराय निर्माण आदि जनहित के काम किए। इस दौरान भारतीय रंगमंच की शास्त्रीय परंपराओं, लोकनृत्य, भावपूर्ण संवाद, सजीव संगीत एवं प्रभावशाली मंच-सज्जा के समन्वय से यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए एक भावनात्मक और प्रेरणादायी साबित हुई। महानाट्य ने ऐतिहासिक चेतना ही जागृत नहीं की, बल्कि कर्मयोग, सेवा और नैतिक नेतृत्व जैसे शाश्वत मूल्यों की प्रासंगिकता को भी उकेरा। सीसीआरटी की यह प्रस्तुति भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, ऐतिहासिक स्मृति के संवर्धन तथा समाज में नैतिक मूल्यों के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में भी देखा गया। मंचन के दौरान पार्श्व संगीत व वाद्य के लिए पूर्व संकलित ध्वनि (रिकार्डेड वॉइस) का सहयोग लिया गया। कलाकारों के संवाद संकलित ध्वनि के साथ बेहतर सामंजस्य बना रहे थे, जिससे कोई यह नहीं भांप सका की संवाद पूर्व संकलित है। मंचन में प्रमुख रूप से सारा शर्मा ने अहिल्याबाई होल्कर, प्रियंका वर्मा ने अहिल्याबाई के बचपन, कनक वर्मा ने अहिल्याबाई की सास गौतम बाई होल्कर, आदित्य वर्मा ने पुत्र माले राव होल्कर, सिद्धार्थ ने ससुर मल्हार राव होल्कर, पियूष गंभीर ने पति खांडेराव होल्कर की भूमिका के साथ लगभग 40 कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि ट्रस्ट महासचिव चम्पतराय ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र, विहिप केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीब सिंह, उमेश पोरवाल, धनंजय, रमाशंकर टिन्नू आदि उपस्थित रहे। महानाट्य की संकल्पना व निर्देशन सीसीआरटी, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर, लेखिका व सह क्षेत्राधिकारी डॉ. जुलेशा सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी देवाराम मेघवाल, कार्यक्रम समन्वयक उप-निदेशक आशुतोष, उप-निदेशक भगवान वर्मा भी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय

Share this story