माटी सम्मान-9’ से नवाजे गए “व्हीट मैन ऑफ इंडिया

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माटी सम्मान-9’ से नवाजे गए “व्हीट मैन ऑफ इंडिया


अयोध्या, 11 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय शैक्षणिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पूर्वांचल महोत्सव में हुए सम्मानित

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को राष्ट्रपति के हाथों “विज्ञान श्री” पुरस्कार मिलने के बाद एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। कुलपति को भारतीय शैक्षणिक क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए लखनऊ के संगीत नाटक अकादमी में आयोजित पूर्वांचल महोत्सव में प्रतिष्ठित ‘माटी सम्मान-9’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पूर्वांचल की कला, संस्कृति एवं विकास के लिए समर्पित संस्था ‘माटी’ की ओर से उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने दिया।

कुलपति को इस सम्मान से नवाजा जाना विश्वविद्यालय के साथ-साथ पूर्वांचल क्षेत्र के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।

शैक्षणिक क्षेत्र में उनके योगदान, उच्च शिक्षा एवं कृषि शिक्षा के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया है। पूर्वांचल महोत्सव माटी-9 में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां, साहित्यिक संवाद तथा पूर्वांचली संस्कृति और खान-पान से जुड़ी विविध झलकियां भी दिखीं। कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को प्रतिष्ठित सम्मान ‘माटी सम्मान-9’ से पुरस्कृत किए जाने पर विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने प्रशन्नता व्यक्त की।

कुलपति डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि माटी सम्मान-9’ से सम्मानित होना मेरे लिए अत्यंत गौरव का विषय है। मेरा सदैव प्रयास रहेगा कि उच्च शिक्षा एवं कृषि शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और अनुसंधान आधारित बनाया जाए, ताकि कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिले और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। यह सम्मान हमें जनहित, शिक्षा और कृषि के उत्थान के लिए और अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करेगा।

इन उपलब्धियों के कारण प्रसिद्ध हैं कुलपति डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंहः

गाजीपुर जिले के ग्राम उधरन निवासी कुलपति डा. ज्ञानेंद्र राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो, आई.सी.ए.आर नई दिल्ली एवं भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के निदेशक के प्रतिष्ठित पद को सुशोभित कर चुके हैं। “विज्ञान श्री” पुरस्कार से राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित हो चुके हैं। कुलपति 70 से अधिक गेहूं की किस्मों को किसानों के लिए विकसित कर चुके हैं जिसमें कई प्रजातियां किसानों में बहुत प्रचलित हैं। यह किस्में अपने भारत वर्ष में 80 प्रतिशत क्षेत्रों में लगाई जाती हैं। इसी कारण कुलपति को “व्हीट मैन ऑफ इंडिया” के नाम से जाना जाता है। कुलपति को हाल ही में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने हाथों राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया। वे अपने करियर में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां बटोर कर देश का नाम रोशन कर चुके हैं। उन्होंने गेहूं की 70 प्रजातियां विकसित की है जिसमें 10 बायो फोर्टीफाइड किस्में शामिल हैं। वे देशभर में वैज्ञानिक एवं शिक्षण कर्मियों की भर्ती के लिए कई चयन समितियों और राज्य चयन बोर्डों में शामिल रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय

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