श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनकर मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनकर मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु
श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनकर मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु


औरैया, 01 अप्रैल (हि.स.)। जनपद के बिधूना कस्बा के बेला रोड स्थित नदी पुल पर पोरवाल परिवार द्वारा कराई जा रही श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठे दिन सुबह वेदिका मंडल स्थल पर प्रतिदिन की भांति मुख्य परीक्षित कृष्णमुरारी पोरवाल, कंचन पोरवाल ने पूजन कर कथा का शुभारंभ किया।

अयोध्या धाम से आये कथा आचार्य श्री श्री बल्लभाचार्य जी महाराज ने मंगलाचरण के उपरांत कथा की श्रृंखला को जोड़ते हुए संगीतमयी श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने भगवान की अनेक लीलाओं में श्रेष्ठतम लीला रास लीला का वर्णन करते हुए बताया कि रास तो जीव का शिव से मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इसमें कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया है, लेकिन वह भगवान को पराजित नहीं कर पाया। उसे ही परास्त होना पड़ा है। रास लीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है।

आचार्य ने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंचगीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुर जी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज ही प्राप्त हो जाती है। महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया। महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा और परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है।

गोपी गीत पर बोलते हुए आचार्य ने कहा जब जीव में अभिमान आता है। भगवान उनसे दूर हो जाता है, लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है, तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है उसे दर्शन देते है। शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का विवाह बनकुटपुरम देश के राजा की पुत्री रुक्मणी के साथ संपन्न हुआ। लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर गंधर्व विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकती।

इस अवसर पर आयोजक लक्ष्मी नारायण पोरवाल, जय नारायण, रामप्रकाश पोरवाल, रामनारायण, छुटकन, गिरिजा शंकर, कृष्ण मुरारी, सीताराम, श्याम जी, नन्दू पोरवाल, संध्या पोरवाल, निधि पोरवाल, रामजी, रघु पोरवाल, अनमोल, भरत जी, अनुष्का, दिव्यांशी, नैंसी, अमर सहित सैकड़ों श्रद्धालु जन मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनील /मोहित

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