प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक में हुई प्रसव पूर्व जांच

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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक में हुई प्रसव पूर्व जांच


प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक में हुई प्रसव पूर्व जांच


प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक में हुई प्रसव पूर्व जांच


प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक में हुई प्रसव पूर्व जांच


प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक में हुई प्रसव पूर्व जांच


- 345 गर्भवतियों की प्रसव पूर्व जांच में 46 एचआरपी चिन्हित

- जिला चिकित्सालय सहित दो एफआरयू में हुआ आयोजन

औरैया, 23 नवम्बर (हि.स.)। मातृत्व स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत गुरुवार को जनपद की फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में “प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक” का आयोजन किया गया।

जनपद में 50 व 100 शैय्या जिला संयुक्त चिकित्सालय सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजीतमल और बिधूना एफआरयू सेंटर में सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक आयोजित हुआ। 345 गर्भवतियों की प्रसव पूर्व जांच की गई। इसमें 45 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी चिन्हित की गईं। गर्भवती महिलाओं को रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां सहित कई अन्य चिकित्सकीय परामर्श दिए गए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर जांच कराने से किसी भी प्रकार की परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता चलने से उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार की ओर से मुफ्त एएनसी जांच की व्यवस्था की गई है।

अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (आरसीएच) डॉ शिशिर पुरी बताते हैं कि प्रसव पूर्व होने वाले टीकाकरण से महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। बीमारियों से लड़ने में आसानी होती है। टीका लगाने से गर्भवती महिला के होने वाले बच्चे का भी संक्रमण से बचाव होता है।

जनपदीय सलाहकार मातृत्व स्वास्थ्य अखिलेश कुमार ने बताया कि क्लीनिक में आई हर गर्भवती का ब्लड टेस्ट, ब्लड प्रेशर, यूरिन टेस्ट, हीमोग्लोबिन, अल्ट्रासाउंड आदि की निःशुल्क जांच की गई। महिलाओं को प्रसव पूर्व उचित देखभाल के लिए सभी महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी। उन्हें बताया गया कि कब-कब कौन सी जांच कराना आवश्यक है। इस अवसर सभी गर्भवती को फल व पोषाहार भी वितरित किया गया। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने कहा स्वास्थ्य विभाग की ओर से जच्चा-बच्चा को सुरक्षित बनाने की हरसंभव कोशिश की जा रही है,जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।

जिला चिकित्सालय आई शहर के नारायणपुर की 22 वर्षीय ख़ुशी ने बताया कि वह पहली बार गर्भवती हुई। उसका 7वां महीना चला रहा है। यहां आने में उन्हें डर भी लग रहा था। दिन के हिसाब से डाक्टर ने बच्चे का वजन कम बताया है और उन्हें दवा के साथ पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी है। वह सामान्य प्रसव चाहती हैं। इसलिए डाक्टर के सलाह पर चलेंगी।

आशा कार्यकर्ता को मिलती है प्रोत्साहन राशि

जिला परामर्शदाता मातृत्व स्वास्थ्य ने बताया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती की तीन अतिरिक्त प्रसव पूर्व जांच के लिए विजिट करने पर आशा कार्यकर्ता को प्रोत्साहन राशि जाती है इसें प्रति विजिट आशा को सौ रुपये दिये जाने का प्रावधान है। चिह्नित एचआरपी वाली गर्भवती के सुरक्षित संस्थागत प्रसव के बाद उसकी देखभाल के लिए 45 दिनों बाद आशा को 500 रुपये प्रसूता की देखभाल के लिए प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनील

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