कष्टों को हरने वाले हैं भगवान : आचार्य मुनेंद्र द्विवेदी

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कष्टों को हरने वाले हैं भगवान : आचार्य मुनेंद्र द्विवेदी


औरैया,2 दिसंबर (हि.स.)। औरैया के अजीतमल कस्बा क्षेत्र के ग्राम चांदूपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को आचार्य मुनेंद्र द्विवेदी ने अपने प्रवचन में कहा कि मानव जीवन स्वभावतः संघर्षों और कष्टों से भरा होता है, किन्तु इन समस्त कष्टों को हरने वाले स्वयं भगवान हैं। उन्होंने कहा कि भगवान भक्तों के प्रेम से अति प्रसन्न होते हैं और उनके नाम का स्मरण मात्र करने से मन में शांति, स्थिरता और सकारात्मकता का संचार होने लगता है।

कथा के दौरान आचार्य द्विवेदी ने पारीक्षित विनोद कुमार कुशवाहा, उनकी पत्नी गीता कुशवाहा व उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का विस्तृत वर्णन सुनाया। उन्होंने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए बताया कि जब मथुरा में इंद्रदेव के प्रकोप से निरंतर भारी वर्षा होने लगी और चारों ओर हाहाकार मच गया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने दिव्य सामर्थ्य से गोवर्धन पर्वत को तर्जनी उंगली पर धारण कर समस्त बृजवासियों तथा पशु-पक्षियों की रक्षा की। इस अद्भुत पराक्रम से इंद्रदेव का अहंकार चूर्ण हो गया।

आचार्य ने बताया कि संकट समाप्त होने के बाद श्रीकृष्ण ने बृजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करने का निर्देश दिया, जो आज भी अन्नकूट महोत्सव के रूप में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। उन्होंने आगे भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मिणी जी के दिव्य विवाह प्रसंग का मनोहारी वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

कथा पंडाल में सजीव झांकियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया, विशेषकर बच्चों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक मंचन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। विवाह प्रसंग के दौरान आचार्य जी ने मंगलाचार व भजनों से वातावरण को इतना रमणीय बना दिया कि उपस्थित श्रोतागण झूमने पर विवश हो उठे।

कार्यक्रम की व्यवस्था में विनोद कुशवाहा, आलोक दीक्षित, सीपू राजावत, सोभित, पंकज, अनुज, प्यारे लाल, सोनू, कमल सिंह राजपूत, सुधीर सहित अनेक युवाओं एवं ग्रामीणों ने योगदान दिया। सभी ने कथा के सुचारू संचालन हेतु पूरी जिम्मेदारी व समर्पण भावना के साथ व्यवस्था संभाली।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार

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