औरैया में 20 करोड़ की 1.36 एकड़ सरकारी भूमि कब्जामुक्त, 39 साल पुराने चकबंदी आदेश को निरस्त कर नगर पंचायत को सौंपी

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औरैया में 20 करोड़ की 1.36 एकड़ सरकारी भूमि कब्जामुक्त, 39 साल पुराने चकबंदी आदेश को निरस्त कर नगर पंचायत को सौंपी


औरैया, 07 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की 1.36 एकड़ सरकारी भूमि को मंगलवार अवैध कब्जे से मुक्त कराकर नगर पंचायत दिबियापुर को सुपुर्द कर दिया। यह कार्रवाई जिलाधिकारी बृजेश कुमार के निर्देशन में न्यायालय के आदेश के अनुपालन में राजस्व और पुलिस टीम की मौजूदगी में की गई।

जिला प्रशासन के अनुसार, तहसील सदर के राजस्व ग्राम ककराही स्थित सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित कन्या पाठशाला की भूमि को वर्ष 1987 में चकबंदी के दौरान कथित रूप से अनियमित एवं अवैध तरीके से ऊसर भूमि से प्रतिस्थापित कर उसके अभिलेखों में परिवर्तन कर निजी संस्था जनता बालिका विद्यालय के नाम दर्ज कर दिया गया था। इसी आधार पर वर्षों से उक्त सरकारी भूमि पर निजी कब्जा बना हुआ था।

मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तहसीलदार सदर ने 24 दिसंबर 1987 को पारित चकबंदी अधिकारी के आदेश के विरुद्ध बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी न्यायालय में अपील दाखिल की। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि प्रथम चक्र की चकबंदी में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए सुरक्षित गाटा संख्या 215 (नया गाटा संख्या 255), रकबा 1.36 एकड़ की भूमि की प्रकृति बदलकर उसे ऊसर भूमि से प्रतिस्थापित किया गया और कन्या पाठशाला के स्थान पर निजी संस्था का नाम दर्ज कर दिया गया, जो कानून के अनुरूप नहीं था।

न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 के तहत सार्वजनिक हित के लिए आरक्षित भूमि को किसी निजी संस्था के नाम दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही द्वितीय चक्र की चकबंदी के दौरान प्रथम चक्र में सुरक्षित सार्वजनिक भूमि की प्रकृति बदलने का अधिकार भी चकबंदी अधिकारियों को प्राप्त नहीं है।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 1987 का आदेश विधिवत प्रक्रिया का पालन किए बिना आकार पत्र-45 पर दर्ज किया गया था। वर्ष 2021 में प्राप्त एक प्रार्थना पत्र के बाद मामले की विधिक समीक्षा कराई गई, जिसके उपरांत न्यायालय ने उक्त आदेश को अधिकार क्षेत्र से परे एवं धोखाधड़ीपूर्ण मानते हुए निरस्त कर दिया और भूमि को पुनः सरकार में निहित घोषित कर दिया।

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में तहसीलदार सदर के नेतृत्व में राजस्व एवं पुलिस टीम ने बुलडोजर की सहायता से अवैध कब्जा हटवाकर भूमि को कब्जामुक्त कराया और नियमानुसार नगर पंचायत दिबियापुर को सुपुर्द कर दिया।

जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने कहा कि सरकारी, सार्वजनिक एवं ग्राम समाज की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या अभिलेखों में अनियमित परिवर्तन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे सभी मामलों की विधिक समीक्षा कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनपद में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा, ताकि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार

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