लाइलाज बीमारी नहीं है अस्थमा : डा.वेद प्रकाश

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लाइलाज बीमारी नहीं है अस्थमा : डा.वेद प्रकाश


लखनऊ, 04 मई (हि.स.)। अस्थमा लाइलाज बीमारी नहीं है। जागरूकता, उचित उपचार, जीवन‑शैली में बदलाव और इनहेलर के सही उपयोग से अस्थमा रोगी सामान्य जीवन जी सकता है। यह जानकारी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा.वेद प्रकाश ने सोमवार को अपने विभाग में आयोजित प्रेसवार्ता में दी।

डा. वेद प्रकाश ने बताया कि विश्व में अनुमानतः 26.2 करोड़ लोग अस्थमा से प्रभावित हैं। भारत में अनुमानतः 2–5 प्रतिशत जनसंख्या अस्थमा से ग्रस्त है।

वहीं महिलाओं में अस्थमा की व्यापकता पुरुषों से अधिक है। अनुमानतः भारत में 3.4 करोड़ से अधिक लोग अस्थमा ग्रसित हैं।

पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा.आर.ए.एस.कुशवाहा ने बताया कि खराब वायु गुणवत्ता भारत में अस्थमा की समस्या का एक प्रमुख कारक है। एक अध्ययन के अनुसार केवल 50 प्रतिशत भारतीय अस्थमा रोगियों का सही निदान व उपचार हो पाता है। डा. कुशवाहा ने बताया कि एलर्जी एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है और इसकी व्यापकता लगातार बढ़ रही है।

अस्थमा के प्रमुख लक्षण

घरघराहट (छाती से सीटी की ध्वनि) ।

साँस फूलना या साँस लेने में कठिनाई ।

विशेषकर रात में या सुबह होने वाली खांसी ।

छाती में जकड़न, दर्द या घुटन‑सा महसूस होना ।

केजीएमयू के पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रोफेसर डा. राजेश कुमार यादव ने प्रेसवार्ता में बताया कि अस्थमा में तुरंत लक्षण से राहत पाने के लिए ब्रोंकोडाएलेटर्स का उपयोग किया जाता है। कारणों की पहचान कर न्यूनतम संपर्क करके अस्थमा को बढाने से रोका जा सकता है। डा. राजेश ने बताया कि नियमित फॉलो‑अपः चिकित्सकीय निगरानी व योजना में समय‑समय पर संशोधन से अस्थमा का समुचित इलाज किया जाता है।

अस्थमा की रोकथाम

वायु प्रदूषण, ठंडी हवा, सुगंध आदि जैसे अस्थमा को ट्रिगर करने वाले कारकों के संपर्क से बचें।

एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों के संपर्क से बचें।

सिगरेट, मोमबत्ती, अगरबत्ती और पटाखों के धुएं से बचें।* बीमार लोगों (सर्दी या फ्लू) से दूर रहें।

आसपास के वातावरण को धूल रहित रखें।

निमोनिया, डिप्थीरिया, टेटनस, दाद और काली खांसी से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाएं।

अस्थमा की दवाएं नियमित रूप से लें।

केजीएमयू में अस्थमा के इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं

डा.वेद प्रकाश ने बताया कि पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग एलर्जी एवं अस्थमा के इलाज के लिए समर्पित है। यहां पर अत्याधुनिक सुविधाओं एवं विशेषज्ञ टीम के साथ, विभाग सटीक निदान के लिए परिष्कृत पल्मोनरी फंक्शन जांच तथा स्किन प्रिक टेस्ट सहित विभिन्न एलर्जी परीक्षण उपलब्ध कराता है। गंभीर अथवा व्यापक अस्थमा में बायोलॉजिक थेरेपी एवं इम्यूनोथेरेपी का विशेषज्ञ मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है, जिससे प्रत्येक रोगी के लिए वैयक्तिकृत एवं प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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