कला व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम : डॉ. मिठाई लाल
कानपुर, 20 जून (हि.स.)। कला केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। ग्रीष्मकालीन कला कार्यशाला में प्रतिभागियों ने जिस तरह उत्साह और रचनात्मकता के साथ भाग लिया है, वह सराहनीय है और यह उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय करेगा। यह बातें शनिवार को इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने कहीं।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में एक माह तक ग्रीष्मकालीन कला कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों द्वारा निर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह के साथ सम्पन्न हुआ।
समापन अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी में प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए चित्र, मृत्तिका शिल्प, फ्लॉवर पॉट्स एवं अन्य कलात्मक कृतियों को प्रदर्शित किया गया, जिन्हें अभिभावकों और कला प्रेमियों ने खूब सराहा।
कार्यशाला में बच्चों एवं युवाओं को ड्राइंग, पेंटिंग, स्टिल लाइफ, लैंडस्केप, क्रिएटिव पेंटिंग, क्राफ्ट तथा अन्य विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। अंतिम चरण में क्ले मॉडलिंग एवं पॉटरी निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. मंतोष यादव ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों में कलात्मक अभिरुचि और सृजनात्मक सोच का विकास करना था।
समापन समारोह में प्रतिभागी गार्वी वर्मा की माता अंजू वर्मा (डिप्टी लेवल कमिश्नर, कानपुर) एवं पिता जितेन्द्र वर्मा (अकाउंट ऑफिसर, आर.एफ.सी., कानपुर) ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को रचनात्मक दिशा देते हैं और उन्हें तनावमुक्त रखते हैं।
इस अवसर पर असिस्टेंट डायरेक्टर जे.बी. यादव, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. बप्पा माजी, प्रिया मिश्रा, कीर्ति वर्मा सहित शिक्षक, अभिभावक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

