अन्नदान का सनातन संस्कृति में विशेष महत्व : प्रशांत गुरु

अन्नदान का सनातन संस्कृति में विशेष महत्व : प्रशांत गुरु
अन्नदान का सनातन संस्कृति में विशेष महत्व : प्रशांत गुरु














- श्री महाकाल अनुसंधान केंद्र पर साप्ताहिक रसोई के तहत शीतलजल, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, जलजीरा आदि का वितरण

मुरादाबाद, 9 जून (हि.स.)। पारकर काॅलेज रोड स्थित श्री महाकाल अनुसंधान केंद्र पर साप्ताहिक रसोई के तहत रविवार को राहगीरों, ऑटो रिक्शा चालक, बैटरी रिक्शा चालक, जरूरतमंद लोगों आदि को शीतल जल, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, जलजीरा आदि का वितरण किया गया।

इस अवसर पर इच्छापूर्ति सिद्धपीठ के महंत प्रशांत गुरु ने कहा कि महाकाल की सेवा से मानव को परमानंद की अनुभूति होती है। सनातन संस्कृति में भूखे को अन्न तथा प्यासे को पानी का विशेष महत्व है, इसलिए महाकाल सेवक संघ ने भीषण गर्मी में लोगों के बीच जाकर उन्हें राहत पहुंचाने का संकल्प लिया है।

प्रशांत गुरु ने आगे कहा कि सृष्टि के संचालक को भली भांति संचालन के लिए महाकाल को प्रसन्न रखना बहुत जरूरी है। महाकाल को प्रसन्न करने के लिए थोड़े से सार्थक प्रयास की आवश्यकता है। नमः शिवाय तथा 'जय श्री महाकाल' का जाप मनुष्य की वैतरणी को पर लगा सकता है।

कार्यक्रम में महाकाल सेवक संघ के प्रमुख सदस्य मोहित राज गुप्ता, अनिल कुमार गुप्ता, वीणा गुप्ता, सुशील कुमार शर्मा, सरदार अमरजीत सिंह सीटा, सरदार परमजीत सिंह, सुनील कुमार शर्मा, आशीष चित्रांश, शिव, मुकेश वर्मा, अमित सक्सेना, अमित यादव ,शास्त्री पुनीत गोयल, श्याम भैया, मनु राज गुप्ता आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार/निमित जायसवाल

/सियाराम

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