समस्याओं का निदान न होने पर भड़के किसान, पानी की टंकी पर चढ़े

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समस्याओं का निदान न होने पर भड़के किसान, पानी की टंकी पर चढ़े


फसल बबार्दी और पेयजल संकट मुख्य मुद्दा, एसडीएम प्रजाक्ता त्रिपाठी ने दिया आश्वासन

मथुरा, 04 अप्रैल (हि.स.)। गोवर्धन तहसील में शनिवार दोपहर उस समय प्रशासनिक अमला संकट में आ गया, जब अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे किसान अचानक पानी की टंकी पर चढ़ गये। लंबे समय से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे किसानों का आरोप है कि शासन प्रशासन उनकी जायज समस्याओं को लगातार अनसुना कर रहा है, जिससे परेशान होकर उन्हें यह कड़ा रुख अपनाना पड़ा।

मलसराय की सावित्री देवी ने कहा कि दस साल गोवर्धन तहसील को बने हुये हो गये लेकिन आज तक रजिस्ट्री दफ्तर नहीं है। आधी अधूरी तहसील बनाकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। ग्रामीणों और किसान नेताओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि क्षेत्र में उचित जल निकासी न होने के कारण सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी है। किसान लंबे समय से जल निकासी के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। कई गांवों में पीने के पानी की टंकियां या तो जर्जर अवस्था में हैं या अभी तक चालू ही नहीं हो सकी हैं। इससे ग्रामीणों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्राकृतिक आपदा और जलभराव से हुए फसल नुकसान के लिए किसान उचित आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं। जैसे ही किसानों के टंकी पर चढ़ने की सूचना मिली, स्थानीय पुलिस और तहसील प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। हालांकि, स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब किसानों ने नीचे उतरने से साफ इनकार कर दिया। प्रदर्शनकारी किसान इस बात पर अड़े रहे कि जब तक जिलाधिकारी खुद मौके पर आकर उन्हें लिखित आश्वासन नहीं देते, वे नीचे नहीं उतरेंगे। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना था कि हम लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। हमारी फसलें बर्बाद हो रही हैं और गांव प्यासे हैं। अब केवल ठोस कार्रवाई के आश्वासन पर ही आंदोलन खत्म होगा।

मौके पर मौजूद एसडीएम प्रजाक्ता त्रिपाठी ने किसानों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि किसानों से लगातार वार्ता की जा रही है। एसडीएम ने आश्वासन दिया है कि जल निकासी और पेयजल से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और किसानों को हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी। इसके बाद आंदाेलित किसान शांत हाे गये। इस दौरान गुड्डन, बीना, मंजू, मिथलेश, अनीता, किरन देवी, गुडडी, शकीना, हरवीरी, उमा, लक्ष्मी सहित गोवर्धन, मलसराय, सकरवा के महिला-पुरूष किसान मौजूद थे।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार

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