2017 से शुरू ‘जनता दर्शन’ बना याेगी सरकार के सुशासन का मजबूत स्तंभ

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2017 से शुरू ‘जनता दर्शन’ बना याेगी सरकार के सुशासन का मजबूत स्तंभ


- योगी हैं तो यकीन है ‘जनता दर्शन’ से देशभर में योगी मॉडल की पैठ

लखनऊ, 22 अप्रैल (हि.स.)। कभी इतिहास में राजा दरबार लगाकर प्रजा की फरियाद सुनते थे, वही परंपरा आज लोकतांत्रिक रूप में उत्तर प्रदेश में जीवंत होती दिख रही है। मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ एक अभिभावक के रूप में जनता दर्शन में लाेगाें तक पहुंच कर उनकी बातें सुनतें और समाधान करते हैं। लाेकप्रियता का आलम यह कि लाेग अपने परिवार के बच्चाें की पढ़ाई से लेकर दवाई तक का दर्द साझा करते हें और उन्हें निराश नहीं हाेना पड़ता है।

राजनीतिक विश्लेषक सियाराम पांडेय का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘जनता दर्शन’ राजधर्म, लोकसंस्कृति और मानवीय संवेदना के संगम का आधुनिक स्वरूप बनकर उभरा है। यहां सत्ता का स्वर आदेशात्मक नहीं, संवादात्मक है। हर फरियादी सिर्फ एक आवेदनकर्ता नहीं, बल्कि एक परिवार के सदस्य की तरह मुख्यमंत्री के सामने खड़ा होता है और यही भाव इस पहल को खास बनाता है।

उत्तर प्रदेश की सत्ता में एक संत की उपस्थिति ने शासन की परिभाषा को नया आयाम दिया है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘नया उत्तर प्रदेश’ सुशासन के एक सशक्त और संवेदनशील मॉडल के रूप में उभर रहा है, जिसका आधार पवित्रता, पारदर्शिता, योग्यता और जनकल्याण है। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री पद संभालने के साथ ही ‘जनता दर्शन’ की शुरुआत की गई थी, जिसका स्पष्ट उद्देश्य था- जन समस्याओं को सीधे सुनना और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना। लखनऊ स्थित 5 कालिदास मार्ग और गोरखपुर में आयोजित यह कार्यक्रम आज सरकार और जनता के बीच एक मजबूत संवाद सेतु बन चुका है।

गौरतलब है कि बीते सोमवार को आयोजित 'जनता दर्शन' में बरेली से आईं दीप्ति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष अपना दर्द बयां किया तो उन्होंने बिना देर किए तुरंत बरेली के जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि वे महिला की समस्या सुनकर प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का लाभ दिलाएं। योगी की संवेदनशीलता देख दीप्ति की आंखें भर आईं। चेहरे पर खुशी का भाव लिए हुए उन्होंने जाते-जाते मुख्यमंत्री योगी को ढेर सारी दुआएं दीं।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ‘जनता दर्शन’ की सबसे बड़ी ताकत मुख्यमंत्री का मानवीय दृष्टिकोण है। कई बार फरियादी भावुक हो जाते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री का धैर्य और गंभीरता उन्हें भरोसा दिलाता है कि उनकी बात सुनी जा रही है और उस पर कार्रवाई होगी।

जनसेवा ही सरकार का धर्म

‘जनता दर्शन’ इस विचार को व्यवहार में उतारता है कि जनसेवा ही सरकार का सर्वोच्च धर्म है। मुख्यमंत्री स्वयं फरियादियों से मिलते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश देते हैं।

सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस पहल की मूल भावना है- जनता को सीधे सरकार से जोड़ना। यहां छोटी से छोटी समस्या भी उतनी ही गंभीरता से सुनी जाती है, जितनी बड़ी शिकायत। आवास, इलाज, शिक्षा, पुलिस, जमीन विवाद से लेकर पारिवारिक मसलों तक हर विषय प्राथमिकता में शामिल रहता है। योगी मॉडल का मूल मंत्र है- योजना का लाभ उसी व्यक्ति तक पहुंचे, जिसके लिए वह बनाई गई है।

‘25 करोड़ जनता ही मेरा परिवार’

राजनीतिक विश्लेषक सियाराम पांडेय का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह कथन कि 25 करोड़ प्रदेशवासी ही मेरा परिवार हैं, जनता दर्शन में व्यवहारिक रूप में दिखता है। पारिवारिक विवाद लेकर आने वालों को वे पहले संवाद और समझदारी से समाधान की सलाह देते हैं, जिससे सामाजिक संतुलन भी मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘राजा’ को ‘पालक’ और ‘संरक्षक’ माना गया है। ‘जनता दर्शन’ उसी विचार को आधुनिक लोकतंत्र में स्थापित करता है।

अन्य राज्यों से भी पहुंच रहे लोग

‘जनता दर्शन’ की विश्वसनीयता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, असम, तेलंगाना, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लोग भी अपनी समस्याएं लेकर यहां पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री उनकी शिकायतों को संबंधित राज्यों तक पहुंचाने के निर्देश देते हैं। इससे इस मॉडल की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश

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