साहित्य समाज का दर्पण, कवि अपनी लेखनी से जगाता है चेतना : राधेश्याम मिश्र

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साहित्य समाज का दर्पण, कवि अपनी लेखनी से जगाता है चेतना : राधेश्याम मिश्र


कानपुर, 20 सितंबर (हि.स.)। साहित्य समाज का दर्पण है और कवि अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को जागरूक करने के साथ ही सामाजिक सरोकारों को जन-जन तक पहुंचाने का काम करता है। कविताएं समाज में सकारात्मक सोच और संवेदनशीलता पैदा करने का सशक्त माध्यम हैं। यह बातें कार्यक्रम संयोजक डॉ. राधेश्याम मिश्र ने रविवार को आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में कहीं।

अनमोल रत्न सेवा संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। समारोह में नीलिमा कटियार समेत साहित्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग शामिल हुए। संस्था अध्यक्ष विशाल अग्रवाल, स्वागताध्यक्ष अमरनाथ मेहरोत्रा और समारोह अध्यक्ष डॉ. उमेश पालीवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राधेश्याम मिश्र और सुप्रसिद्ध संचालक डॉ. शिव ओम अंबर ने किया।

कवि सम्मेलन में डॉ. योगिता चौहान ने मां वाणी की वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद डॉ. शिव ओम अंबर, डॉ. शील भदावरी, अनिल बाजपेई, डॉ. राजकुमार रंजन, अनिल अमल और जय प्रकाश मिश्र समेत कई कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, जबकि सामाजिक और राष्ट्रभाव से जुड़ी कविताओं को भी सराहना मिली। कार्यक्रम में नीलिमा कटियार ने कहा कि कवि अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को सदैव जागृत करता रहा है।

इस अवसर पर आमंत्रित कवियों को विभिन्न स्मृति सम्मानों से सम्मानित किया गया। डॉ. शिव ओम अंबर को तपेश्वरी प्रसाद स्मृति सम्मान, अनिल दीक्षित को संतोष कुमार शाक्य स्मृति सम्मान, शील भदावरी को आत्म प्रकाश शुक्ल स्मृति सम्मान, योगिता चौहान को रूपरतन बाजपेई स्मृति सम्मान, जय प्रकाश मिश्र को पं. चक्रधर पाण्डेय स्मृति सम्मान, अल्पना दीक्षित को लालमणि त्रिपाठी स्मृति सम्मान और अनिल अमल को राहुल कनौडिया स्मृति सम्मान प्रदान किया गया। इसके अलावा अन्य कवियों को भी स्मृति सम्मान देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. राधेश्याम मिश्र और विशाल अग्रवाल ने अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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