हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी : डॉ. अनुराग मेहरोत्रा

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हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी : डॉ. अनुराग मेहरोत्रा


कानपुर, 27 अप्रैल (हि.स.)। तेजी से बढ़ रही गर्मी में हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है और समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। लोगों को चाहिए कि वे शरीर को ठंडा रखें, पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लेते रहें और दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें, क्योंकि सतर्कता ही इससे बचाव का सबसे कारगर तरीका है। यह बातें सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कही।

भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए आज आईएमए कानपुर शाखा ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर लोगों को जागरूक किया। परेड स्थित टेम्पल ऑफ सर्विस सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने हीट स्ट्रोक के खतरे, लक्षण और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।

चिकित्सकों ने बताया कि जब शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है और शरीर उसे नियंत्रित नहीं कर पाता, तब हीट स्ट्रोक की स्थिति बनती है। इसके संकेतों में तेज बुखार, चक्कर आना, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, त्वचा का गर्म और सूखा हो जाना तथा गंभीर स्थिति में बेहोशी शामिल हैं।

आईएमए की सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने कहा कि गर्मी के मौसम में सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों को रहता है। तेज धूप और लू का असर आंखों पर भी पड़ता है, जिससे जलन, सूखापन और संक्रमण की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में नियमित रूप से पानी पीना, धूप में निकलते समय आंखों की सुरक्षा करना और शरीर में पानी की कमी न होने देना बेहद जरूरी है।

वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत दीक्षित ने कहा कि हीट स्ट्रोक के गंभीर मामलों में शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे भ्रम, बेहोशी और दौरे जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत ठंडी जगह पर ले जाकर शरीर का तापमान कम करने का प्रयास करें और बिना देरी के चिकित्सकीय सहायता दिलाएं, क्योंकि देर होने पर दिमाग को स्थायी नुकसान भी हो सकता है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी कि लोग दोपहर 12 बजे से चार बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें, सिर को ढककर रखें और पानी, छाछ, नींबू पानी जैसे तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।

डॉक्टरों ने यह भी बताया कि प्राथमिक उपचार के रूप में मरीज को ठंडी जगह पर ले जाना, शरीर को ठंडा करना और होश में होने पर तरल पदार्थ देना जरूरी है। स्थिति गंभीर होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

अंत में आईएमए पदाधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे खुद जागरूक रहें और दूसरों को भी हीट स्ट्रोक से बचाव के प्रति जागरूक करें, ताकि इस भीषण गर्मी में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम किया जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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