तकनीकी शिक्षा में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी महिला सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण : राज्यपाल

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तकनीकी शिक्षा में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी महिला सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण : राज्यपाल


लखनऊ, 07 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू), लखनऊ का 24वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। समारोह में कुल 62,537 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही 55 विद्यार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि तथा 84 पदक प्रदान किए गए। पदक विजेताओं में 52 छात्राओं तथा 31 छात्रों को सम्मानित किया गया। सभी उपाधियों एवं प्रमाणपत्रों को डिजीलाकर पर उपलब्ध कराया गया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने जनपद सीतापुर के 340 आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने के लिए आंगनबाड़ी किट वितरित कीं। इस अवसर पर जनपद लखनऊ की 500 एवं जनपद सीतापुर की 435 सहित कुल 935 बेटियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई गई। विश्वविद्यालय द्वारा राजकीय बालगृह (बालिका) सिंधीखेड़ा में स्थापित चार एसी तथा गोद लिए गए दो विद्यालयों में विकसित स्मार्ट क्लासों का भी राज्यपाल जी ने लोकार्पण किया।

राज्यपाल ने कहा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिस्थितियां नहीं, बल्कि परिश्रम, चरित्र और ऊंचे सपने व्यक्ति का भविष्य निर्धारित करते हैं। उन्होंने कहा कि साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाले डॉ. कलाम प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें स्वयं रामेश्वरम जाकर वह प्राथमिक विद्यालय देखने का अवसर मिला, जहां डॉ. कलाम ने शिक्षा ग्रहण की थी और बाद में अपनी प्रतिभा एवं वैज्ञानिक कौशल से पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया।

राज्यपाल ने कहा कि डॉ. कलाम का विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं था, बल्कि ज्ञान, नवाचार, नैतिकता, आत्मनिर्भरता और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण भारत का निर्माण उनका लक्ष्य था। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे बड़े सपने देखें, कठिन परिश्रम करें और ज्ञान, विज्ञान, नवाचार तथा नैतिक मूल्यों के आधार पर भारत को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान दें।

उन्होंने कहा कि आज का दीक्षांत समारोह केवल उपाधियां और पदक प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का उत्सव है। राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष उपाधियों एवं पदकों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक रही है, जो तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, उत्कृष्ट प्रदर्शन और महिला सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। प्रतिभा का कोई लिंग नहीं होता और बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। साथ ही उन्होंने छात्रों को भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा का उद्देश्य दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि स्वयं को निरंतर बेहतर बनाना होना चाहिए।

विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि नैक से ए-प्लस ग्रेड प्राप्त इस विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने एआईसीटीई आइडिया लैब, इंफोसिस मेकर्स लैब, इनक्यूबेशन सेंटर, 100 करोड़ रुपये की इनोवेशन निधि, कलाम पेटेंट सेंटर के माध्यम से निःशुल्क पेटेंट सुविधा, भाभा टीचिंग असिस्टेंटशिप, स्पेस एवं क्वांटम टेक्नोलॉजी में माइनर डिग्री तथा फॉरेंसिक साइंसेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहलों की सराहना की।

उन्होंने परीक्षा प्रणाली में ऑनलाइन प्रश्नपत्र वितरण, ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन तथा सीसीटीवी आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को पारदर्शिता और दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय इन व्यवस्थाओं को अपनाएं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, गोद लिए गए विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरण तथा राजकीय बालगृह, बालिका सिंधी खेड़ा के विकास के लिए किए गए कार्यों की भी सराहना की।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण, भारतीय भाषाओं के संवर्धन, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए करें। उन्होंने कहा कि भारत अब तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीक का निर्माता बन रहा है और युवाओं को इस परिवर्तन का नेतृत्व करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय भाषाओं, संस्कृत तथा प्राचीन ग्रंथों एवं दुर्लभ पांडुलिपियों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनका संरक्षण किया जाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की अमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्यपाल ने भारतीय नौसेना में शामिल स्वदेशी युद्धपोतों, भारत में निर्मित सी-295 विमान, डीआरडीओ द्वारा विकसित लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल जैसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारत की वैज्ञानिक क्षमता, इंजीनियरिंग कौशल और आत्मनिर्भरता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आने वाला भारत सरकारों के निर्णयों से ही नहीं, बल्कि युवाओं के शोध, स्टार्टअप, नवाचार और कल्पनाशक्ति से निर्मित होगा।

विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ज्ञान को नवाचार से, नवाचार को राष्ट्र निर्माण से तथा राष्ट्र निर्माण को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करें। जिस राष्ट्र के युवा नवाचार को अपना संकल्प बना लेते हैं, उस राष्ट्र के भविष्य को कोई शक्ति रोक नहीं सकती। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा भारत को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आप सभी भावी इंजीनियर हैं, इसलिए निर्माण कार्यों में केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि उपयोगिता, गुणवत्ता और संवेदनशीलता का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। विश्वविद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं प्राथमिक विद्यालयों के भ्रमण के दौरान उन्हें अनेक भवनों के डिजाइन एवं निर्माण में व्यावहारिक कमियां दिखाई देती हैं। भवनों का डिजाइन वहां की आवश्यकता तथा उनका उपयोग करने वाले बच्चों की आयु एवं जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। विशेष रूप से आंगनबाड़ी एवं प्राथमिक विद्यालयों में छोटे बच्चों के अनुरूप शौचालय सहित सभी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए तथा निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की विसंगति नहीं होनी चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय

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