अक्षय तृतीया आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार का संदेश देने वाला महापर्व : मुनि श्री
-अक्षय तृतीया पर मुनि सान्निध्य में भक्तामर विधान से भक्तिमय हुआ वातावरण
प्रयागराज, 19 अप्रैल (हि.स)। जैन धर्म के दानतीर्थ प्रवर्तक महापर्व ‘अक्षय तृतीया’ का आयोजन जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। श्री दिगम्बर जैन पंचायती सभा प्रयागराज के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और दिन भर धर्माराधना में लीन रहे। पर्व का आयोजन मुनि श्री 108 वासुपूज्य सागरजी महाराज एवं मुनि श्री 108 अतुल सागरजी महाराज के सान्निध्य में हुआ।रविवार काे प्रातःकाल मंदिर में अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। जिसके पश्चात श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक भगवान की आराधना की।
इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि अक्षय तृतीया केवल दान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार का संदेश देने वाला महापर्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में अहिंसा, अपरिग्रह और सेवा भाव अपनाने का आह्वान किया।
राजेश कुमार जैन ने बताया कि जैन परम्परा में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को राजा श्रेयांस द्वारा इक्षुरस (गन्ने का रस) का प्रथम आहार अर्पित किया गया था। जिससे दान की पवित्र परम्परा का शुभारम्भ हुआ। इसी कारण यह पर्व दान, त्याग और संयम की प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर भक्तामर विधान का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें मंत्रोच्चार, स्तुति एवं विधि-विधान के साथ भगवान की आराधना की गई। विधान के दौरान मंदिर परिसर भक्ति रस में डूबा नजर आया और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पर्व के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने दान, संयम और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। सम्पूर्ण आयोजन भक्तिमय वातावरण में हुआ। जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

