मिट्टी बचाने के लिए प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाएं : डॉ. खलील खान
कानपुर, 04 जून (हि.स.)। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक और असंतुलित प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है तथा इसका प्रतिकूल असर पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहिए। यह बातें गुरुवार को मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने कहीं।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर एवं भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम असानी निवादा, विकासखंड बिल्हौर में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिले में एक जून से 30 जून तक चलाए जा रहे “खेत बचाओ अभियान” के तहत किसानों को उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है। कार्यक्रम में डॉ. खलील खान ने किसानों को मृदा परीक्षण, जैविक खादों के उपयोग, फसल अवशेष प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती की तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी।
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने किसानों को प्राकृतिक खेती एवं मृदा संरक्षण के लाभों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी सुरक्षित रखी जा सकती है।
वैज्ञानिक डॉ. आदर्श कुमार ने बताया कि पूरे जून माह में अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक किसानों को पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ा जा सके।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा हरी खाद के उपयोग और उसके लाभों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में डॉ. राजेश राय, डॉ. अंतरा दास, ग्राम प्रधान कौशल किशोर तिवारी सहित 60 से अधिक महिला एवं पुरुष किसान उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

