हरी खाद अपनाकर मिट्टी की सेहत सुधारें, रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें : डॉ. शशिकांत

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हरी खाद अपनाकर मिट्टी की सेहत सुधारें, रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें : डॉ. शशिकांत


कानपुर, 27 जून (हि.स.)। हरी खाद के उपयोग और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है, जिससे खेतों की सेहत के साथ किसानों की आय में भी सुधार होगा। गर्मी के मौसम में ढैंचा, सनई, उड़द और मूंग जैसी हरी खाद वाली फसलों के अवशेष खेत में मिलाना लाभदायक है। यह बातें शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र, दलीप नगर के वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत ने चौबेपुर विकासखंड के ग्राम निगोहा में आयोजित खेत बचाओ अभियान के दौरान कहीं।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, दलीप नगर की ओर से खेत बचाओ अभियान के तहत ग्राम निगोहा में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मृदा संरक्षण, जैविक पदार्थों के महत्व और टिकाऊ खेती के तरीकों की जानकारी दी गई।

डॉ. शशिकांत ने बताया कि मृदा में जीवांश पदार्थ बढ़ने से उसकी गुणवत्ता में सुधार होता है, जबकि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी और मानव स्वास्थ्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों से हरी खाद को खेती का नियमित हिस्सा बनाने की अपील की।

उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि गर्मी के मौसम में गहरी जुताई करने से खेतों में कीट-पतंगों और खरपतवारों की संख्या कम होती है, जिससे अगली फसल के लिए बेहतर वातावरण तैयार होता है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।

कार्यक्रम में ग्राम निगोहा के सैकड़ों किसानों ने भाग लेकर मृदा संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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