उप्र में स्मार्ट मीटर के नाम पर भ्रष्टाचार के मीटर लगाए जा रहे हैं : वंशराज दुबे

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उप्र में स्मार्ट मीटर के नाम पर भ्रष्टाचार के मीटर लगाए जा रहे हैं : वंशराज दुबे


स्मार्ट मीटर की सच्चाई पर आप प्रवक्ता वंशराज दुबे का बड़ा खुलासा, यूपी में ‘डिजिटल लूट’ का लगाया आरोप

लखनऊ, 22 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और जनता के साथ धोखे का मामला सामने आया है। आम आदमी पार्टी (आआपा) उत्तर प्रदेश के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर स्मार्ट मीटर की समस्या को लेकर प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर योजना, जिसे प्रदेश में डिजिटल क्रांति के रूप में पेश किया गया था, आज “डिजिटल लूट” का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है। उन्होंने कहा कि रिचार्ज खत्म होते ही बिजली काट दी जाती है और रिचार्ज करने के बाद भी 2 से 12 घंटे तक बिजली बहाल नहीं होती, जो सरकार की नीयत और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता है।

वंशराज दुबे ने कहा कि भाजपा ने 2019-20 में यह सपना दिखाया था कि स्मार्ट मीटर लगाकर उत्तर प्रदेश को तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाएगा, लेकिन हकीकत यह है कि यह योजना पूरी तरह फेल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर अब इतने “स्मार्ट” हो गए हैं कि पैसा खत्म होते ही तुरंत बिजली काट देते हैं, लेकिन रिचार्ज के बाद बिजली देने में घंटों लगा देते हैं।

उन्होंने कहा कि पावर कॉरपोरेशन की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के लगभग 2 लाख उपभोक्ताओं को समय से बिजली नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें लगभग 70 लाख प्रीपेड मीटर हैं। 13 मार्च से 10 अप्रैल के बीच करीब 50 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शन बैलेंस खत्म होने के कारण काट दिए गए। वहीं रिचार्ज के बाद भी लाखों उपभोक्ता घंटों तक बिजली के इंतजार में बैठे रहे।

मुख्य प्रदेश प्रवक्ता ने सरकार की नीतिगत विफलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार कहती है कि स्मार्ट मीटर लगवाना वैकल्पिक होगा, लेकिन दूसरी तरफ अधिकारियों द्वारा जबरन घरों में मीटर लगाए जा रहे हैं और बाद में उन्हें प्रीपेड में बदल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह जनता के साथ सीधा छलावा है और यह दर्शाता है कि इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे बड़ा घोटाला और कमीशनखोरी छिपी हुई है।

वंशराज दुबे ने आरोप लगाया कि लगभग 03 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने के इस प्रोजेक्ट में करीब 20,000 करोड़ रुपए का खर्च दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि पहले सिंगल फेज मीटर के लिए 6016 रुपये और थ्री फेज के लिए 12000 रुपये तक वसूले गए, जो विरोध के बाद घटाकर क्रमशः 2800 रुपये और 4010 रूपये आ गए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कीमत इतनी कम हो सकती थी, तो पहले इतनी ज्यादा वसूली क्यों की गई? यह साफ तौर पर बड़े स्तर की गड़बड़ी और कमीशनखोरी की ओर इशारा करता है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि स्मार्ट मीटर से बिलिंग में पारदर्शिता आएगी, 24 घंटे बिजली मिलेगी और उपभोक्ता खुद नियंत्रण कर पाएंगे, लेकिन लखनऊ जैसे शहर में ही 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही है, तो गांवों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाली पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मैं स्वयं इसका प्रत्यक्षदर्शी हूं कि सुल्तानपुर के जयसिंहपुर क्षेत्र समेत कई इलाकों में बिजली के तार खेतों के ऊपर लटक रहे हैं, जिससे फसलों में आग लगने तक की घटनाएं हो रही हैं। गलत बिलिंग और बिजली कटौती से आम जनता और किसान दोनों परेशान हैं।

वंशराज दुबे ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन किए, जिसके बाद सरकार पर दबाव बना और स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म करने की बात सामने आई। लेकिन जमीनी हकीकत अब भी इसके उलट है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार “डिजिटल इंडिया” के नाम पर मैन्युअल तरीके से जनता की जेब काट रही है। जब जनता अपनी समस्याएं लेकर मंत्री के पास जाती है, तो समाधान के बजाय मंत्री द्वारा जय श्री राम के नारे सुनने को मिलते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

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