अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाए जाने की आवश्यकता



—बीएचयू में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने महिलाओं को प्रोत्साहन तथा अवसर उपलब्ध करवाए जाने की बात की

वाराणसी, 25 जनवरी (हि.स.)। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन के आह्वान पर तथा भारत को जी–20 समूह की अध्यक्षता मिलने पर बुधवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र तथा अर्थशास्त्र विभाग के तत्वावधान में गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘बहुपक्षवाद में महिलाओं के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर अंतर पीढ़ी संवाद’ विषयक गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि कुलपति सांची विश्वविद्यालय प्रो. नीरजा गुप्ता ने बहुपक्षवाद का अर्थ बताया।

उन्होंने प्राचीन भारत में ‘स्त्रीराज्य’ तथा ‘सभावती’ के माध्यम से तत्कालीन समय में महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कुंती और द्रौपदी जैसे पौराणिक पात्रों के माध्यम से प्राचीन भारत के कूटनीति समेत विविध क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बारे में बताया।

गोष्ठी में संकाय प्रमुख, सामाजिक विज्ञान संकाय बीएचयू, प्रो. बिंदा दत्तात्रेय परांजपे ने वैश्विक स्तर पर घटने वाली घटनाओं के संदर्भ में महिलाओं की स्थिति पर ध्यान देने पर जोर दिया। कुलगुरु, बीएचयू प्रो. वी.के. शुक्ला ने अध्यक्षता की।

कार्यक्रम संयोजक प्रो. निधि शर्मा ने आभार ज्ञापन किया। चर्चा के प्रथम सत्र का विषय ‘बहुपक्षवाद में भारतीय महिलाएं एवं भारत द्वारा जी–20 समूह की अध्यक्षता’ रहा।

चर्चा की प्रथम वक्ता, ऑनलाइन माध्यम से अमेरिका से जुड़ीं गूगल में उत्पाद प्रबंधक वैभवी गंगवार ने कहा कि सामाजिक और पारिवारिक स्तर की बाधाओं के साथ साथ हमें अपनी मानसिक स्तर की भी बाधाएं, जो हमारे विकास को अवरूद्ध करती हैं, उन्हें दूर करना पड़ेगा।

इसके बाद ऑनलाइन माध्यम से अमेरिका से जुड़ी दूसरी वक्ता दंत चिकित्सक डा. अंकिता शर्मा ने दवाओं और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान पर प्रकाश डाला तथा उन्होंने महिलाओं को प्रोत्साहन तथा अवसर उपलब्ध करवाए जाने की बात की।

सत्र की तीसरी वक्ता, निदेशक नॉन कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

प्रो. गीता ने कहा कि वही समाज प्रगति कर सकता है जो संकुचित मानसिकता का त्याग कर आधुनिक परिपाटी पर खरा उतरे। उन्होंने महिला अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले पुरुषों का स्मरण करने की भी बात की। श्रोताओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए सत्र की चौथी वक्ता प्रो. नीरजा गुप्ता ने औपनिवेशिक आधुनिकता से मुक्ति पाकर सभी बाधाओं को तोड़ने की बात रखी तथा उन्होंने महिलाओं के प्रति समान व्यव्हार करने की बात की।

राजनीति विज्ञान की सहायक आचार्या डा. वैशाली रघुवंशी ने भारतीय बहुपक्षवाद को बताया। चर्चा के द्वितीय सत्र का विषय ‘वैश्विक नेतृत्व में महिलाएं: लैंगिक समानता का मार्ग’ रहा।

चर्चा के द्वितीय सत्र में वंदना कुमार, अपर सचिव राज्यसभा सचिवालय तथा अपर सचिव नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार, त्रिशा सकलेचा, लेखिका तथा मनोनीत निदेशक टैगोर सेंटर, बर्लिन, प्रो. गीता सिंह, इतिहास विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, लोशनी नायडू, गोपिओ समन्वयक दक्षिण अफ्रीका, प्रो. अनीता सिंह, अंग्रेजी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा डा. बगीशा सुमन, राजनीति विज्ञान विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने भाग लिया। गोष्ठी में 200 से अधिक श्रोताओं ने भाग लिया। श्रोता दीर्घा में भी वसंत कन्या महाविद्यालय, वसंता कॉलेज फॉर वूमेन, महिला महाविद्यालय, आर्य महिला पीजी कॉलेज तथा अर्थशास्त्र विभाग की छात्राएं मौजूद रहीं।

हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर

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