हिन्दू धर्म में बसन्त पंचमी का विशेष महत्व, बारिश से लोग परेशान



प्रयागराज, 26 जनवरी (हि.स.)। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी एवं गणतंत्र दिवस दोनों हैं। लेकिन सुबह से हो रही बारिश न होने वाले कार्यक्रमों में खलल डाल दिया। आज के दिन विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। हिन्दू धर्म में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। आज के दिन गंगा स्नान के उपरान्त मां सरस्वती की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

शहर में जहॉ झण्डारोहण की तैयारी में लोग जुटे रहे वहीं दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु बारिश के कारण दुबके रहे। सुबह लगभग नौ बजे बारिश रूकी तो लोगों का कार्यक्रम आगे बढ़ा। पौराणिक मान्यता है कि वाग्देवी मां सरस्वती की आराधना और ज्ञान के महापर्व को बसंत पंचमी के रूप में जाना जाता है।

माघ मेला स्थित शिविर में काशी सुमेरूपीठाधीश्वर स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि आज के दिन लोग गंगा स्नान के उपरान्त सरस्वती की भी आराधना करते हैं। शिक्षा प्रारम्भ करने या किसी नई कला की शुरूआत करने के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग पीले रंग का वस्त्र पहन कर सरस्वती मां की पूजा करते हैं। बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु की शुरूआत होती है।

दण्डी सन्यासी के पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने बताया कि भारत में बसंत पंचमी के त्योहार को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। आज के दिन से ऋतु परिवर्तन की शुरूआत भी होती है और नये कार्यक्रमों का शुभारम्भ होता है। बसंत पंचमी होली के तैयारी की शुरुआत का भी प्रतीक है। बसंत पंचमी के 40 दिन बाद होली का त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित रहता है। इस दिन स्कूलों और कॉलेजों के साथ-साथ मंदिरों में भी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।

उन्होंने बताया कि साल की छह ऋतुओं में बसंत के आगमन पर माघ शुक्ल पक्ष पंचमी पर्व पर भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा भी की जाती है। विद्या, बुद्धिदाता, सरस्वती, वाघेश्वरी देवी, वीणा वादिनी, वाग्देवी आदि नामों से पूजा जाता है। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण संगीत की देवी के जन्मोत्सव को भी बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। शिक्षाविद, विद्यार्थी ज्ञानवान होने की प्रार्थना इसी दिन करते हैं। इस विशेष दिन अबूझ मुहूर्त मानकर विद्यारंभ, अन्नप्राशन, विवाह, मुंडन गृह प्रवेश के शुभ कार्य भी किए जाते हैं।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने की परम्परा है। शुभ मुहूर्त में देवी सरस्वती की पूजा विशेष फलदायी होती है। आज गुरूवार को सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 7ः12 से शुरू होकर दोपहर 12ः33 तक रहेगा। इस वर्ष बसंत पंचमी का दिन बहुत ही विशेष होने वाला है।

हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त

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