प्रत्येक रचनाकार को अपना निर्मम आलोचक भी होना चाहिए : प्रो राजेन्द्र

प्रत्येक रचनाकार को अपना निर्मम आलोचक भी होना चाहिए : प्रो राजेन्द्र


--‘कहानी कैसे लिखें’ पर व्याख्यान एवं स्वलिखित कहानी पाठ प्रतियोगिता

प्रयागराज, 23 सितम्बर (हि.स.)। हिन्दी पखवाड़ा के अन्तर्गत हिन्दी विभाग एवं भाषा केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में शुक्रवार को ‘कहानी कैसे लिखें’ विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान एवं स्वलिखित कहानी पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रो. राजेन्द्र कुमार ने कहा कि मातृ भाषा हमारी बोलियाँ होती हैं। प्रत्येक रचनाकार को अपना निर्मम आलोचक भी होना चाहिए। एक बेहतर रचना के लिए बेहतर आलोचक होना जरूरी है।

डॉ अजय कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित व्याख्यान में प्रो.राजेन्द्र कुमार, वरिष्ठ कवि, आलोचक, इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने हिन्दी एवं कहानी लेखन के विविध पक्षों को रेखांकित करते हुए कहा कि कोई भी भाषा केवल पखवाड़े भर के लिए न होकर वह निरंतर और सर्वकालिक होती है। क्या हम केवल पखवाड़े भर के लिए हिंदी-हिंदी करके कल्याण कर सकते हैं? हिन्दी हमारी माँ है, जिसके हम सब संतान हैं और माँ हमेशा हमसे जुड़ी रहती हैं। सच कहा जाय तो मातृ भाषा हमारी बोलियाँ होती हैं।

कहानी लेखन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विधा की रचना करने के लिए सबसे पहले प्रतिभा आवश्यक होती है। प्रतिभा के बाद व्यक्ति की संवेदना महत्वपूर्ण होती है। इसके बाद भाषा का प्रश्न जरूरी हो जाता है। भाषा को लेकर लोगों में यह गलतफहमी रहती है कि हमें अपनी भाषा सीखने की क्या जरूरत है। वास्तविकता यह है कि भाषा को लगातार सीखने और परिमार्जित करने की जरूरत है। आपकी भाषा पर जितनी ज्यादा पकड़ होगी रचना उतनी ही ज्यादा बेहतर ढंग से अभिव्यक्त हो सकेगी। उनका कहना था कि कहानी पर बोलना और लिखना दोनों अलग बात है।

व्याख्यान एवं प्रतियोगिता का संयोजन डॉ आलोक मिश्रा, संचालन डॉ गायत्री सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अमरजीत राम ने किया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी स्वरचित विभिन्न कहानियों का पाठ किया। कहानी पाठ प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल के सदस्य अर्थशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ वेदप्रकाश मिश्र एवं हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य डॉ अमरजीत राम उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त महाविद्यालय के शिक्षकगण डॉ रचना सिंह, डॉ मान सिंह, डॉ गरिमा, डॉ रश्मि, डॉ हर्षमणि, डॉ अश्विनी देवी, डॉ शाइस्ता इरशाद, शोधार्थी कुलदीप कुमार गौतम, अमिता, रीमा, जयसिंह यादव, हर्ष सिंह, शालिनी सिंह, कुलदीप यादव, अनुराग यादव, अनूप द्विवेदी सहित कई छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त

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